पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह भी वोट डालने पहुंचे।
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चुनाव आयोग ने सोमवार को बताया कि देश के 4796 वोटरों में 99 फीसदी ने राष्ट्रपति चुनाव में वोट डाला है। दस राज्यों और केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 100 फीसदी वोटिंग हुई है। छत्तीसगढ़, गोवा, गुजरात, हिमाचल, केरल, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, मणिपुर, सिक्किम, तमिलनाडु में सभी विधायकों ने अपने वोट डाले हैं।
सांसद के वोट का मूल्य घटा
राष्ट्रपति चुनावों में एक सांसद के मत का मूल्य 708 होता है, लेकिन इस बार यह घटकर सिर्फ 700 रह गया है। दरअसल, जम्मू-कश्मीर में विधानसभा का गठन अब तक नहीं होने के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। राज्यों में विधायकों के मत का मूल्य जनसंख्या के आधार पर तय होता है। यूपी के एक विधायक के मत का मूल्य सबसे अधिक 208, जबकि सिक्किम के विधायक के मत का मूल्य सात है।
मिस्टर बैलेट बॉक्स...विमानों से लाए गए दिल्ली
राष्ट्रपति चुनाव में इस्तेमाल हुईं मत पेटियां सोमवार रात से दिल्ली पहुंचने लगीं। इन पेटियों को उसी तरीके से वापस लाया जा रहा है जैसे इन्हें दिल्ली से राज्यों में भेजा गया था। इसके लिए विमानों में मिस्टर बैलट बॉक्स के नाम से अलग सीट बुक की गई हैं। दिल्ली व चार अन्य पड़ोसी राज्यों से संसद भवन स्थित स्ट्रांग रूम में मतपेटियां पहुंच चुकी हैं। गुजरात, कर्नाटक, असम, राजस्थान से भी पेटियां देर रात दिल्ली पहुंचीं।
कोई व्हीलचेयर पर तो कोई अस्पताल से वोट देने आया
आम चुनाव की तरह ही राष्ट्रपति चुनाव में वोटरों का उत्साह देखते बना। पूर्व प्रधानमंत्री डॉक्टर मनमोहन सिंह 89 वर्ष की आयु में भी व्हीलचेयर पर वोटर डालने संसद पहुंचे। उन्होंने एक सहायक की मदद से वोट डाला। ओडिशा में भाजपा विधायक और नेता प्रतिपक्ष प्रदीप्त कुमार नायक अस्पताल से सीधे व्हीलचेयर पर ऑक्सीजन सिलिंडर के साथ वोट डालने विधानसभा पहुंचे। पटना में भाजपा विधायक मिथिलेश कुमार स्ट्रेचर पर वोट देने आए। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन कोरोना के कारण अस्पताल में थे। वह सीधे वोट देने विधानसभा पहुंचे। बंगलूरू में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा व्हीलचेयर पर वोट देने पहुंचे।
वोट डालने में लड़खड़ाए मुलायम
मैनपुरी के सपा सांसद और यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव (82) पहली बार वोट डालने में लड़खड़ा गए और उन्हें दूसरा मौका दिया गया।
क्रॉस वोटिंग पर कार्रवाई नहीं
राजनीतिक दल राष्ट्रपति चुनावों में व्हिप जारी नहीं कर सकतीं। यह चुनाव गुप्त मतदान के जरिये होता है, जिससे यह पता नहीं चल सकता कि किसने किसे वोट दिया है।