राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शनिवार को आर्मी एयर डिफेंस कोर को प्रेसिडेंट कलर्स सम्मान से नवाजा। गंजमपुर जिले के गोपालपुर मिलिट्री स्टेशन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान कोर की तरफ से आर्मी एयर डिफेंस सेंटर ने राष्ट्रपति से यह सम्मान ग्रहण किया। बता दें कि प्रेसिडेंट कलर्स किसी भी रेजिमेंट को देश की सुरक्षा में दिए गए योगदान के लिए मिलने वाला सर्वोच्च सम्मान माना जाता है।
राष्ट्रपति ने ‘किल द आर्मी इन द स्काई’ के स्लोगन वाली आर्मी एयर डिफेंस कोर को यह सम्मान उसके गठन के 25 साल पूरा होने के मौके पर दिया। इस दौरान राष्ट्रपति की पत्नी सविता कोविंद, थलसेना अध्यक्ष जनरल बिपिन रावत, ओडिशा के राज्यपाल गणेशी लाल और केंद्रीय पेट्रोलियम व इस्पात मंत्री धर्मेंद्र प्रधान भी मौजूद रहे।
राष्ट्रपति ने यह सम्मान देते हुए कोर के जवानों की विपरीत परिस्थितियों में भी साहस दिखाने के लिए तारीफ की और उनसे राष्ट्रीय सम्मान को बनाए रखने के लिए हमेशा बेहतरीन प्रदर्शन करने की अपील भी की। उन्होंने कोर के शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा, उनकी शहादत ने हमारे देश की संप्रभुता की रक्षा की, गौरव दिलाया और आम जनता को सुरक्षित बनाया। उन्होंने कोर के सभी पूर्व और सेवारत सैनिकों को उनके अतुलनीय योगदान के लिए बधाई भी दी।
राष्ट्रपति ने याद दिलाया कोर का इतिहास
राष्ट्रपति कोविंद ने आर्मी एयर डिफेंस कोर के स्वर्णिम इतिहास की भी याद दिलाई। उन्होंने कहा, भले ही आर्मी एयर डिफेंस कोर 10 जनवरी, 1994 को आर्टिलरी रेजिमेंट से अलग होकर स्वतंत्र शाखा बनी, लेकिन उसका इतिहास दूसरे विश्व युद्ध से जुड़ा है।
उन्होंने कहा, दूसरे विश्व युद्ध के दौरान आर्मी एयर डिफेंस के सैनिकों ने म्यांमार (तत्कालीन बर्मा), मलाया, बहरीन, सिंगापुर, इराक और पर्शिया (ईरान) में बेहतरीन युद्धकला का प्रदर्शन किया था। उन्होंने कहा, स्वतंत्रता के बाद भी एयर डिफेंस रेजिमेंट गोवा के मुक्ति संग्राम में बहादुरी से लड़ी।
भारत-चीन के बीच 1962 के युद्ध में इसके सैनिकों की तरफ से उत्तर-पूर्व क्षेत्रों में दिया गया मजबूत एयर डिफेंस कवर भी याद करने लायक है। राष्ट्रपति ने कहा, एयर डिफेंस के तोपचियों ने भारत-पाक के बीच 1965 और 1971 के युद्धों में भी अहम योगदान दिया था और जम्मू-कश्मीर से लेकर उत्तर-पूर्वी राज्यों तक में उग्रवादियों के खिलाफ अभियानों के दौरान इसकी भूमिका महत्वपूर्ण रही है।