तमिलनाडु की 15 साल की एन नंदनी ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ कार्यक्रम की वर्षगांठ के मौके पर जब अपनी कहानी सुनायी, तो पूरा सभागार तालियों से गूंज उठा। नंदनी ने बाल विवाह के खिलाफ आवाज बुलंद की थी। दिल्ली के प्रवासी भारतीय केंद्र में बृहस्पतिवार को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान की वर्षगांठ पर नंदनी समेत पंजाब और नगालैंड से आई बच्चियों ने अपने संघर्ष की कहानी सुनायी।
तिरुवन्नामलाई जिले की नंदनी जब 13 साल की थी और कक्षा आठ में पढ़ती थी, तब उसके परिवार वाले उसकी मर्जी के खिलाफ शादी करने जा रहे थे। स्कूल में चाइल्ड लाइन और बाल विवाह के खिलाफ सूचना के चलते उसे ज्ञान हुआ कि परिजन उसका बालविवाह नहीं कर सकते। शादी से एक दिन पहले जिलाधिकारी को फोन करके उसने मदद की गुहार लगाई। जिस पर कार्रवाई करते हुए जिला विकास अधिकारी डोरथी की मदद से वह बची और अभी चाइल्ड केयर होम में रहकर अपनी पढ़ाई कर रही है।
इस समारोह में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास में अव्वल पांच राज्यों को सम्मानित किया गया। इसमें नगालैंड, राजस्थान, हरियाणा मध्यप्रदेश और तमिलनाडु प्रमुख रहे। इसके अलावा 23 जिलों को भी बालिका शिक्षा, कन्या भ्रूण हत्या रोकने आदि के लिए सम्मानित किया गया। महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने कहा कि पिछले चार सालों में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए लोगों की मानसिकता बदलने में मंत्रालय ने काफी प्रयास किये हैं।