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Pune Porsche Case: किशोर के दोस्त के पिता सहित दो लोगों की न्यायिक हिरासत, हादसे के वक्त कार में सवार थे दोनों

Mon, 26 Aug 2024 11:54 PM IST
विशांत श्रीवास्तव न्यूज डेस्क, अमर उजाला, पुणे

सार

पुणे के पोर्श कार हादसे में आरोपी किशोर के दोस्त के पिता सहित दो लोगों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। आरोपी आदित्य अविनाश सूद और आशीष सतीश मित्तल दोनों ही व्यक्ति हादसे के वक्त कार में मौजूद थे। 
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पोर्श कार - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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पुणे के पोर्श कार हादसे के मामले में किशोर के दोस्त के पिता सहित दो लोगों को कोर्ट ने न्यायिक हिरासत में भेजा गया। पुलिस ने आदित्य अविनाश सूद (52) और आशीष सतीश मित्तल (37) को 19 अगस्त को गिरफ्तार किया था। 

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दोनों आरोपी घटना के समय  मुख्य आरोपी किशोर के साथ कार में मौजूद थे। दोनों के ही रक्त नमूनें परीक्षण के लिए भेजे गए थे। पुलिस के मुताबिक रक्त के नमूनों की अदला-बदली की गई, क्योंकि कार में सवार तीनों लोग नशे में थे।

जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश यू एम मुधोलकर ने सूद और मित्तल को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, हालांकि अभियोजन पक्ष ने उनकी पुलिस हिरासत बढ़ाने की मांग की थी। अभियोजन पक्ष ने अदालत को बताया कि वह आगे की जांच करना चाहता है क्योंकि दोनों ने रक्त के नमूनों की अदला-बदली के लिए अन्य आरोपियों, जिनमें किशोर के माता-पिता, विशाल और शिवानी अग्रवाल, डॉ. अजय तवरे, डॉ. श्रीहरि हल्नोर और वांछित आरोपी अरुण कुमार सिंह भी शामिल थे।
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अभियोजन पक्ष ने अदालत को यह भी बताया कि वे इस बात की भी जांच करना चाहते हैं कि क्या आरोपियों के बीच वित्तीय लेनदेन हुआ था। हालांकि, बचाव पक्ष के वकीलों ने मामले की जांच पूरी होने की बात कहते हुए रिमांड बढ़ाने का विरोध किया। जांचकर्ताओं के अनुसार, अरुण कुमार सिंह ने मित्तल से अपने रक्त के नमूने देने के लिए कहा ताकि इसका उपयोग सिंह के नाबालिग बेटे के संबंध में शराब का पता लगाने वाले परीक्षणों के लिए किया जा सके।

पुलिस के अनुसार, दूसरे नाबालिग के मामले में, उसके पिता (सूद) के नमूनों का इस्तेमाल किया गया था।

क्या है पूरा मामला?
पुणे शहर में 18-19 मई की दरम्यानी रात को करीब तीन करोड़ रुपये की पोर्श कार को तेज गति से दौड़ाने के चक्कर में 17 साल के लड़के ने एक बाइक को टक्कर मार दी थी। गाड़ी की टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक अपना संतुलन खोकर काफी दूर तक सड़क पर घिसटते चली गई, जिससे उस पर सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मौके पर मौजूद लोगों ने हादसे की सूचना पुलिस को दी, जिसके बाद आरोपी नाबालिग को गिरफ्तार कर लिया गया।

इस घटना के 14 घंटे बाद आरोपी नाबालिग को कोर्ट से कुछ शर्तों के साथ जमानत मिल गई थी। कोर्ट ने उसे 15 दिनों तक ट्रैफिक पुलिस के साथ काम करने और सड़क दुर्घटनाओं के प्रभाव-समाधान पर 300 शब्दों का निबंध लिखने का निर्देश दिया था। बाद में विवाद बढ़ा तो कोर्ट ने उसकी जमानत रद्द कर दी। हालांकि, पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी शराब के नशे में था और बेहद तेज गति से कार को चला रहा था।

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