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Lancet study : प्रदूषण के कारण 2019 में विश्व में सर्वाधिक 23.5 लाख मौतें भारत में, लैंसेट की रिपोर्ट

Wed, 18 May 2022 02:02 PM IST
सुरेंद्र जोशी पीटीआई, नई दिल्ली

सार

लैंसेट के अध्ययन की मानें तो भारत में रोज 6500 मौतें प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से हो रही हैं। दुनिया में हर छठी मौत विभिन्न तरह के प्रदूषण से हो रही है। 
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दिल्ली में वायु प्रदूषण - फोटो : istock
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विस्तार
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भारत में हर तरह के प्रदूषण के कारण वर्ष 2019 में दुनिया में सर्वाधिक 23.5 लाख से ज्यादा समय पूर्व मौतें हुई हैं। इसमें से 16.7 लाख मौतें सिर्फ वायु प्रदूषण के चलते हुई हैं। 

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अग्रणी पत्रिका द लैंसेट प्लैनेटरी हेल्थ जर्नल में प्रकाशित एक नए अध्ययन में यह दावा किया गया है। अध्ययन रिपोर्ट के अनुसार भारत में वायु प्रदूषण से हुई मौतों में से भी सर्वाधिक 9.8 लाख मौतें आबोहवा में घुले धूल के कणों (PM2.5) से प्रदूषण के कारण हुईं। हवा में मौजूद ये छोटे प्रदूषण कण ढाई माइक्रोन या उससे कम चौड़ाई के होते हैं। वायु प्रदूषण के कारण हुईं शेष 6.1 लाख मौतें घरेलू वायु प्रदूषण की वजह से हुईं। 

रोज 6400 मौतें, चौंका रहा आंकड़ा
सालभर में 23.5 लाख मौतों के आधार पर रोजाना की औसत मौतें निकालें तो यह संख्या 6400 होती है। यानी रोज 6400 लोग प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों से मर रहे हैं। यह संख्या कोरोना महामारी के आंकड़े से कई गुना ज्यादा है। कोरोना से देश में करीब ढाई साल में 5 लाख से ज्यादा मौतें हुई हैं। इसलिए अध्ययन में दिया गया प्रदूषण से मौतों का आंकड़ा चौंकाने वाला है। 
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दुनियाभर में हुईं 90 लाख मौतें
विश्व स्तर पर देखें तो 2019 में प्रदूषण के कारण 90 लाख मौतें हुई हैं। यह संख्या दुनियाभर में हर छह मौतों में से एक है। इन 90 लाख मौतों में से 66.70 लाख मौतों की वजह घरेलू प्रदूषण व वातावरण में फैले प्रदूषण है। 

प्रदूषण के कारण रोज 6500 मौतें
दुनिया में हर छठी मौत विभिन्न तरह के प्रदूषण से हो रही है। इस रिपोर्ट में भारत के लिए राहत की बात यही है कि 2015 के मुकाबले 2019 में मौतों का आंकड़ा घटा है। 2015 में 25 लाख मौतें हुई थीं, वहीं 2019 में 23.5 लाख मौतें हुईं। 

चीन में बढ़ी मौतें
चीन में 2015 में प्रदूषण से 18 लाख लोगों की मौत हुई थी। 2019 में यह बढ़कर 21.7 लाख पहुंच गई है। भारत में हवा सबसे घातक है। 2019 में वायु प्रदूषण से 16 लाख, जल प्रदूषण से 5 लाख और पेशेगत प्रदूषण से 1.6 लाख मौतें हुईं।

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