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कांग्रेस के बिना विधानसभा चुनावों के लिए बना विपक्ष का राजनीतिक मोर्चा, सीपीआई-सपा आए साथ

Thu, 20 Sep 2018 08:12 PM IST
अमित शर्मा, नई दिल्ली
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कांग्रेस लोकसभा चुनाव के लिए एक राष्ट्रव्यापी महागठबंधन बनाने की कोशिश कर रही है। लेकिन उसके ठीक पूर्व मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना जैसे राज्यों के विधानसभा चुनावों में वह किसी तरह का महागठबंधन बनाने की कोशिश करती नहीं दिख रही है। इसकी बजाय कुछ राज्यों में वह वहां के स्थानीय मजबूत दलों से गठबंधन करने की कोशिश अवश्य कर रही है। कांग्रेस के इसी रुख को देखते हुए बाकी विपक्षी दलों ने आपस में एक गठबंधन बनाकर अपनी ताकत दिखाने के लिए कोशिशें शुरू कर दी हैं। इसी क्रम में सीपीआई, सीपीआई (एम), जनता दल (सेकुलर), समाजवादी पार्टी और आरएलडी ने मिलकर 'राजस्थान डेमोक्रेटिक फ्रंट' का गठन किया है। इस फ्रंट में इस समय सात दल शामिल हैं। इसके अलावा कुछ किसान संगठनों और आदिवासी समूहों का समर्थन भी इसे प्राप्त है। राजस्थान के चुनाव में ये सभी दल मिलकर हर सीट पर एक साझा उम्मीदवार उतारेंगे। पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा ने हाल ही में इस फ्रंट की जयपुर में एक बैठक ली थी जिसमें चुनाव लड़ने की रणनीति पर विचार किया गया था। 
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सीपीआई के राष्ट्रीय सचिव अतुल अंजान के मुताबिक गठबंधन में शामिल सभी दलों ने अपने प्रभाव वाली कुछ सीटों की पहचान की है। सीपीआई ने राजस्थान की 40, मध्यप्रदेश की लगभग 28 और छत्तीसगढ़ की एक दर्जन सीटों पर अपना अच्छा प्रभाव होने की बात कही है। अंजान के मुताबिक इसका यह अर्थ नहीं है कि हमें इन सीटों पर ही चुनाव लड़ना है। इनमें कुछ सीटें ऐसी भी हैं जहां अन्य दलों ने भी अपना अच्छा प्रभाव होने की बात कही है। ऐसे में किस सीट पर कौन लड़ेगा, इस पर अंतिम निर्णय एक बैठक में आपसी विचार विमर्श के बाद लिया जाएगा। 

इस सवाल पर कि क्या बसपा इस गठबंधन का हिस्सा होगी, सीपीआई नेता अतुल कुमार अंजान ने अमर उजाला से कहा कि इस समय बसपा मध्यप्रदेश जैसे राज्यों में कांग्रेस से गठबंधन करने की कोशिश कर रही है। उसने मध्यप्रदेश में लगभग दो दर्जन और छत्तीसगढ़ में भी लगभग 12 सीटों पर अपनी दावेदारी पेश किया है। लेकिन कांग्रेस उसे इतना महत्त्व देने की स्थिति में नहीं है। ऐसे में अगर बसपा कांग्रेस के साथ नहीं जाती तो हम उसे खुद से जोड़ने की पूरी कोशिश करेंगे। अंजान ने कहा कि फिलहाल ऐसी कोई पहल अब तक नहीं की गई है। 

 
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किसानों के मुद्दे पर दिल्ली में कई बार बड़ा प्रदर्शन कर अपनी ताकत दिखा चुके वामदलों का मानना है कि किसानों और आदिवासियों की केंद्र सरकार से नाराजगी के कारण वे इस बार इन चुनावों में बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। लेकिन इस सवाल पर कि मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान जैसे राज्यों में जहां कांग्रेस भाजपा के सीधे टक्कर में है, वामपंथी दल वहां कितनी सार्थक भूमिका निभा सकेंगे, अंजान ने कहा कि जनता मोदी सरकार से बेहद नाराज है। वह अपना समर्थन उसी को देगी जो उसके हक की लड़ाई सबसे मजबूत ढंग से लड़ेगा। और हाल ही में पूरे देश ने देखा है कि किसानों को उनकी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के मुद्दे पर, आदिवासियों और छात्रों की बेरोजगारी की लड़ाई में सीपीआई सबसे आगे रही है। ऐसे में उन्हें उम्मीद है कि किसान और आदिवासी उनका समर्थन करेंगे। 

अंजान ने कहा कि कांग्रेस को गुजरात की गलती इन राज्यों में नहीं दुहराना चाहिए। गुजरात में कांग्रेस काफी आगे चल रही थी, लेकिन ऐन मौके पर पिछड़ गई। उसके लगभग 15 उम्मीदवार दो हजार से भी कम वोटों के अंतर से चुनाव हार गए। अगर कांग्रेस ने गुजरात में आदिवासी समूहों को साथ लिया होता तो चुनाव परिणाम कुछ और होता। 
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