विदेश मंत्री सुषमा स्वराज अगले सप्ताह न्यूयार्क में होने वाली संयुक्त राष्ट्र महासभा 'यूएनजीए' बैठक में अपने पाकिस्तानी समकक्ष शाह महमूद कुरैशी से मिलेंगी। स्वराज करतारपुर साहिब कारिडोर के मुद्दे को उठाएंगी।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रवीश कुमार ने कहा कि देश में सभी राजनीतिक दलों ने इस मुद्दे को उठाया है। हाल ही में केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने भी विदेश मंत्री को इस बाबत चिठ्ठी लिखी थी। इसका जवाब देते हुए विदेश मंत्री ने कहा था कि वह इस विषय को पाकिस्तानी सरकार के समक्ष उठाएंगी। क्रिकेटर से नेता बने नवजोत सिंह सिद्धू ने भी इस मुद्दे को उठाया था।
सिर्फ मुलाकात के लिए हामी, अभी कोई एजेंडा तय नहीं
रवीश ने कहा कि अभी तक हमारे पास से ऐसा कोई आधिकारिक संवाद नहीं है कि पाकिस्तान की सरकार इस विषय पर विचार करने को इच्छुक है। इसीलिये विदेश मंत्री यूएनजीए बैठक में पाकिस्तानी विदेश मंत्री अपने पाकिस्तानी समकक्ष के समक्ष इस मुद्दे पर बात करेंगी। रवीश ने बताया कि इसका दिन और समय दोनों देशों की सहमति से तय होगा। उन्होंने कहा कि अभी महज मुलाकात के लिए हामी भरी गई है, इस मीटिंग का कोई एजेंडा तय नहीं किया गया है।
धार्मिक स्थलों की यात्रा संबंधी प्रोटोकॉल में करतारपुर साहब शामिल नहीं
विदेश मंत्रालय से मिली जानकारी के मुताबिक 1974 में भारत और पाकिस्तान के बीत धार्मिक स्थलों की यात्रा से संबंधित एक प्रोटोकॉल हुआ था। इस प्रोटोकाल में करतारपुर साहिब शामिल नहीं है। 1999 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने लाहौर यात्रा के दौरान पाक सरकार के सामने इस मुद्दे को उठाते हुए सिखों की धार्मिक आस्था से जुड़े इस धार्मिक स्थल की वीजा मुक्त यात्रा पर विचार करने का अनुरोध किया था।
मंत्रालय ने बताया कि इसके बाद पंजाब के तत्कालीन मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल के अनुरोध पर तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने एक सितंबर 2004 को प्रकाशोत्सव की 400वीं वर्षगांठ के अवसर पर अमृतसर में करतारपुर साहिब यात्रा के संबंध में सुविधा की घोषणा की थी। इसके बाद 4 सितंबर 2004 को विदेश सचिव स्तर की वार्ता के दौरान करतारपुर साहिब को प्रोटोकॉल के तहत सूची में शामिल करने के लिए पाकिस्तानी पक्ष से अनुरोध किया गया था। हालांकि, पाकिस्तानी पक्ष ने इस पर सहमति नहीं जताई थी। साल 2005 में पाकिस्तान ने तीन धार्मिक स्थलों की यात्रा वीजा के साथ करने की अनुमति दी थी लेकिन करतारपुर साहिब को इसमें शामिल नहीं किया था।
2008 में भी तब के विदेश मंत्री ने करतारपुर साहिब के मुद्दे को अपने पाकिस्तानी समकक्ष के सामने रखा था, लेकिन तब से पाकिस्तान की ओर से इस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
पाक प्रधानमंत्री भी चाहते हैं दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की मुलाकात
इससे पहले पाक प्रधानमंत्री इमरान खान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कोदोनों देशों के बीच संवाद बेहतर करने के लिए पत्र लिखा था। इमरान चाहते हैं कि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज और पाक विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी के बीच वार्ता हो। खान का यह पत्र पीएम मोदी के उस पत्र के जवाब में था जिसमें उन्होंने दोनों देशों के बीच सार्थक और रचनात्मक बातचीत के लिए कहा था। बता दें कि पाकिस्तान चुनाव में जीत मिलने के बाद इमरान खान ने कहा था कि यदि भारत रिश्तों को सामान्य करने की दिशा में एक कदम आगे बढ़ाएगा तो वह दो कदम आगे बढ़ाएंगे।