फिल्म पद्मावती पर विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। फिल्म से इतर यह विवाद अब राजनीतिक रूप ले चुका है। मध्य प्रदेश, पंजाब, गुजरात के मुख्यमंत्री इसकी रिलीज पर पाबंदी लगाने की बात कह चुके हैं।
वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा है कि राज्य में फिल्म पर प्रतिबंध नहीं लगाएंगे, लेकिन सेंसर बोर्ड के फैसले के बाद ही कोई निर्णय लेंगे। इस बीच बुधवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में करणी सेना के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह कल्वी ने दिल्ली में मीडियाकर्मियों से कहा कि फिल्मकार हमारा सॉफ्ट टारगेट नहीं हैं। सबसे सॉफ्ट टारगेट तो हमारा इतिहास है।
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हम पूर्वजों के उस इतिहास को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं। हम किसी भी सूरत में भावनाओं को आहत नहीं होने देंगे। कल्वी ने कहा, ‘मैं खुद रानी पद्मिनी के 37वीं पीढ़ी का हूं। संजय लीला भंसाली से हमारी कोई दुश्मनी नहीं है। मगर उनकी तरफ से हमें भरोसे में नहीं लिया गया। इसके खिलाफ मुहिम में राजपूत ही नहीं, हर धर्म व समाज के लोग समर्थन कर रहे हैं। धीरे-धीरे कई राज्य इस पर पाबंदी लगा चुके हैं।
उन्होंने कहा कि भंसाली हमें दिखाने के बजाय फिल्म किसी और को दिखा रहे हैं।हम प्रधानमंत्री से मांग करते हैं कि पूरे देश में फिल्म पर प्रतिबंध लगे। उन्होंने कहा कि जौहर में जला दी जानी चाहिए फिल्म की रील। इस विवाद पर कांग्रेस महासचिव अशोक गहलोत का कहना है कि पद्मावती को लेकर सरकार राजनीति कर रही है।
विवाद को जानबूझकर लंबा खींचा जा रहा है। उनका आरोप है कि फिल्म में जिस आपत्ति की बातें बताई जा रही हैं, वैसी ही बातें राजस्थान सरकार की वेबसाइट में भी मौजूद हैं, उसे तो नहीं हटाया गया है।