न्याय विभाग के इनपुट को अस्पष्ट बताते हुए सीजेआई जस्टिस डीवाई चंद्रचूड़ के नेतृत्व वाले कॉलेजियम ने बिना नाम लिए लक्ष्मना चंद्र विक्टोरिया गौरी मामले का जिक्र किया। उन्हें फरवरी, 2023 में मद्रास हाईकोर्ट में अतिरिक्त जज बनाया गया। कॉलेजियम ने कहा, यह इनपुट कि उम्मीदवार माकपा समर्थक माना जाता है, अस्पष्ट व ठोस आधार से रहित है। यह सभी मामलों में पर्याप्त कारण नहीं हो सकता। कॉलेजियम ने कहा, हाल ही में एक वकील को हाईकोर्ट जज बनाया गया। जबकि वह पूर्व में एक राजनीतिक दल की पदाधिकारी थीं।
एलडीएफ ने बनाया था सरकारी वकील
न्याय विभाग के इनपुट में कहा गया है, माधवन को माकपा समर्थक माना जाता है। उन्हें लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) सरकार ने 2010 व 2016-2021 में सरकारी वकील नियुक्त किया था। माधवन अनुसूचित जाति से हैं। कॉलेजियम ने कहा, इनपुट उनकी उम्मीदवारी खारिज करने का वैध आधार नहीं बनता।
नियुक्ति के लिए योग्य व उपयुक्त
सरकारी वकील के रूप में उम्मीदवार की नियुक्ति यह संकेत देगी कि उन्होंने उन मामलों को संभालने में पर्याप्त अनुभव पाया होगा, जहां राज्य एक पक्ष है। इसने उम्मीदवार को हाईकोर्ट जज बनाने के योग्य पाया। कॉलेजियम ने वकील एएचएम अब्दुल अजीज, एसकेवी मुदावक्कट, हरिशंकर वी मेनन, एमएस नायर व ई सुब्रमणि को भी केरल हाईकोर्ट में जज बनाने की सिफारिश की थी।