भारत ने शुक्रवार को ताइवान पर अपना रुख साफ कर दिया है। केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन ने राज्यसभा में बताया कि ताइवान को लेकर देश की नीति साफ और सुसंगत है। यह व्यापार, निवेश, पर्यटन, शिक्षा, संस्कृति जैसे क्षेत्रों में आपसी बातचीत को बढ़ावा देने और लोगों के बीच आदान-प्रदान पर केंद्रित है।
मुरलीधरन ने कहा, भले ही ताइवान और भारत के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं है लेकिन दोनों पक्षों के बीच व्यापार व लोगों के आपसी संबंध हैं। बता दें, 1949 से ताइवान का स्वतंत्र अस्तित्व रहा है। लेकिन पड़ोसी चीन उसे अपने एक प्रांत के तौर पर देखता है।
हालांकि ताइवानी नेताओं और अधिकारियों का मानना है कि ताइवान स्वायत्त देश है। इससे पिछले कुछ समय से चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने पिछले दिनों कहा था कि वह किसी भी हालात में ताइवान को चीन में मिलाएंगे।
99 देशों ने भारतीयों को दी यात्रा में राहत
एक अन्य सवाल के जवाब में मंत्री वी मुरलीधरन ने कहा, विदेश मंत्रालय ने बाहरी यूनिवर्सिटियों में पढ़ रहे भारतीय छात्रों के लिए यात्रा प्रतिबंधों में ढील की जरूरत का मुद्दा विदेशी सरकारों के समक्ष उठाया है। 29 नवंबर तक 99 देशों ने दोनों टीके लगवा चुके भारतीयों को यात्रा में ढील प्रदान की है।
ओमिक्रॉन के कारण संसद के कार्यक्रम में नहीं आए कई देश
संसद की लोकलेखा समिति (पीएसी) के अध्यक्ष कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी का कहना है कि ओमिक्रॉन के कारण कई देश संसद के कार्यक्रम में हिस्सा लेने नहीं आए। पीएसी के 100 वर्ष पूरे करने पर 4-5 दिसंबर को होने वाले समारोह शुक्रवार को बताया कि विदेशों की 52 हस्तियों को आमंत्रित किया था। कई देशों ने ओमिक्रॉन के कारण आने से इनकार कर दिया, जबकि पाकिस्तान ने अब तक जवाब नहीं दिया है।