केरल की एक सत्र अदालत द्वारा रोमन कैथोलिक बिशप फ्रेंको मुलक्कल को राज्य के एक कॉन्वेंट में एक नन से दुष्कर्म के आरोप से बरी करने के एक दिन बाद केरल पुलिस ने शनिवार को हाई कोर्ट में फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए कानूनी सलाह मांगी। कोट्टायम की एसपी डी शिल्पा ने संवाददाताओं से कहा कि पुलिस ने फैसले के खिलाफ अपील करने के लिए विशेष लोक अभियोजक से कानूनी राय मांगी है। उन्होंने कहा कि हमें शुक्रवार देर रात विस्तृत फैसला मिला। हमने अपील को आगे बढ़ाने के लिए कानूनी राय मांगी है।
इस बीच बिशप ने विभिन्न चर्चों का दौरा किया और पूर्व विधायक पीसी जॉर्ज से मुलाकात की जो इस मुद्दे के सामने आने के बाद से मुलक्कल का समर्थन कर रहे थे। बिशप, जॉर्ज के साथ एक संक्षिप्त बैठक के बाद पास के चर्चों की यात्राओं के लिए रवाना हुए लेकिन मीडिया के सामने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। बैठक के बाद मीडिया से मिले जॉर्ज ने कहा कि यह मामला चर्च को निशाना बनाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि यह मामला चर्च और इस पर विश्वास रखने वालों को निशाना बनाने की साजिश का हिस्सा है।
रोमन कैथोलिक चर्च के जालंधर सूबा के बिशप रहने के दौरान 57 वर्षीय मुलक्कल पर 2014 और 2016 के बीच इस जिले में एक कॉन्वेंट की यात्रा के दौरान कई बार नन के साथ दुष्कर्म करने का आरोप लगा था। शिकायतकर्ता मिशनरीज ऑफ जीसस का सदस्य है। बिशप को बरी करते हुए अतिरिक्त जिला और सत्र न्यायालय कोट्टायम के न्यायाधीश ने आदेश में कहा कि पीड़िता का दावा है कि 13 मौकों पर दबाव में उसके साथ दुष्कर्म किया गया था, उसकी गवाही में एकरूपता नहीं है और इस पर भरोसा नहीं किया जा सकता है।
कोर्ट ने कहा- पीड़िता के बयानों में एकरूपता नहीं होने से विश्वसनीयता पर सवाल
इससे पहले बिशप फ्रैंको को बरी करने वाली अदालत ने कहा कि विभिन्न समय पर अलग-अलग लोगों के समक्ष अलग-अलग बयान ने उसकी (नन की) विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। मुलक्कल को बरी करते हुए कोट्टायम के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश-प्रथम, गोपाकुमार जी ने घटना के बारे में पीड़िता के बयानों में एकरूपता नहीं होने और अभियोजन के मामले को साबित करने के लिए ठोस साक्ष्य के अभाव सहित विभिन्न कारणों का जिक्र किया।
न्यायाधीश ने 289 पन्नों के अपने फैसले में कहा कि पीड़िता का यह दावा कि उसके साथ 13 बार बलात्कार हुआ, इस पर उसकी एकमात्र गवाही के आधार पर यकीन नहीं किया जा सकता। अदालत ने कहा कि अभियोजन पीड़िता, एक गवाह और अन्य का मोबाइल फोन अदालत के समक्ष पेश करने में नाकाम रहा, जबकि पूरा मामला आरोपी द्वारा पीड़िता को मोबाइल फोन पर भेजे गए कुछ अश्लील संदेशों के आधार पर बनाया गया था।