भारतीय उष्णदेशीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) द्वारा प्रबंधित वायु गुणवत्ता व मौसम पूर्वानुमान एवं अनुसंधान प्रणाली (सफर) के अनुसार बुधवार शाम छह बजे मुंबई की हवा में पीएम 10 का स्तर 143 दर्ज किया गया जबकि दिल्ली में यह 122 था। मुंबई के प्रभारी मंत्री दीपक केसरकर ने दावा किया कि मेट्रो जैसी विकास परियोजनाओं के चल रहे कार्यों से शहर में धूल (Dust) से प्रदूषण हो रहा है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) की वैज्ञानिक सुषमा नायर ने कहा कि नमी की उपलब्धता, प्रति चक्रवाती पवन संचरण (एंटी-साइक्लोनिक विंड सर्कुलेशन) की उपलब्धता है जो हवा को चढ़ने की अनुमति नहीं देता है। प्रति चक्रवात (एंटी-साइक्लोन) मुंबई के ठीक ऊपर है। उन्होंने कहा कि इसके कारण हवा में नमी फंस जाती है।
हालांकि, चिकित्सा पेशेवरों ने कहा कि हवा के स्तर में गिरावट के साथ सांस की बीमारियां आती हैं। सर एच एन रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल के पल्मोनरी मेडिसिन डिपार्टमेंट के मेंटर डॉ. राजेश शर्मा ने कहा कि आमतौर पर जब हवा की गुणवत्ता बहुत खराब होती है, तो उसमें बहुत सारे पार्टिकुलेट मैटर (पीएम), गैसें और इमारतों में फर्नीचर बनाने या पॉलिश और पेंटिंग के काम के लिए इस्तेमाल होने वाले रसायन होते हैं।
शर्मा ने कहा, जब हवा की गुणवत्ता वास्तव में खराब होती है, और लोग लगातार इसकी (खराब हवा) सांस लेते हैं, तो वे ब्रोंकाइटिस विकसित करते हैं। खराब वायु गुणवत्ता और खांसी, सांस फूलने और घबराहट जैसे लक्षणों के बीच एक निश्चित संबंध है। उन्होंने कहा कि हवा की खराब गुणवत्ता महत्वपूर्ण स्वास्थ्य समस्याओं से जुड़ी हुई है, और सबसे अधिक अतिसंवेदनशील बुजुर्ग हैं।
महाराष्ट्र के मंत्री दीपक केसरकर ने माना कि शहर में वायु प्रदूषण बढ़ा है। उन्होंने बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के मुख्यालय में संवाददाताओं से कहा कि यह रासायनिक प्रदूषण नहीं है। उन्होंने कहा कि शहर में मेट्रो, पुलों के साथ-साथ रियल एस्टेट परियोजनाओं का काम चल रहा है। केसरकर ने कहा, मुंबई में प्रदूषण रासायनिक प्रदूषण नहीं है, यह ज्यादातर धूल प्रदूषण (Dust Pollution) है। अधिकारी इसे रोकने के तरीकों की तलाश कर रहे हैं।