पीएम मोदी ने भाषण के दौरान कहा, "अभी तक लोग अपने घर की या अपनी दुकान की सुरक्षा के लिए अलीगढ़ के भरोसे रहते थे। पता है न, क्योंकि अलीगढ़ का ताला अगर लगा होता था तो लोग निश्चिंत हो जाते थे। और मुझे आज बचपन की एक बात याद करने का मन कर रहा है। करीब 55-60 साल पुरानी बात है। हम बच्चे थे, तो अलीगढ़ से ताले के जो सेल्समैन होते थे। एक मुस्लिम मेहरबान थे, वो हर तीन महीने हमारे गांव आते थे। अभी भी मुझे याद है, वे काली जैकेट पहनते थे और सेल्समैन के नाते दुकानों में अपना ताला रख कर जाते थे और तीन महीने बाद आकर पैसे ले जाते थे।"
मोदी ने बताया- "ताला विक्रेता अगल-बगल के गांवों में भी व्यापारियों के पास जाते थे और उनको ताले देते थे। मेरे पिताजी से उनकी बहुत अच्छी दोस्ती थी और वो आते थे तो चार-छह दिन हमारे गांव में रुकते थे और दिन भर जो पैसे वो वसूल कर के ले आते थे, वो पैसे वो मेरे पिताजी के पास छोड़ देते थे। मेरे पिताजी उनके पैसों को संभालते थे। जब चार-छह दिन बाद वो मेरा गांव छोड़कर जाते थे, तो मेरे पिताजी से पैसे लेकर फिर अपनी ट्रेन से निकल जाते थे।"
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, "हम बचपन में उत्तर प्रदेश के दो शहरों से बड़े परिचित रहे। एक सीतापुर और दूसरा अलीगढ़। हमारे गांव में अगर किसी को आंख की बीमारी में ट्रीटमेंट करनी है, तो हर कोई कहता था कि सीतापुर जाओ। हम ज्यादा समझते नहीं थे, लेकिन सीतापुर शब्द सुनते थे। दूसरा इन महाशय के कारण अलीगढ़ बार-बार सुनते थे। लेकिन अब अलीगढ़ के रक्षा उपकरण भी काम आएंगे। कल तो जो अलीगढ़ ताले के जरिए घरों की, दुकानों की रक्षा करता था। 21वीं सदी में वो मेरा अलीगढ़ हिंदुस्तान की सीमाओं की रक्षा का काम करेगा। यहां ऐसे आयुध बनेंगे। वन डिस्ट्रिक्ट, वन प्रोडक्ट योजना के तहत यूपी सरकार ने अलीगढ़ के तालों और हार्डवेयर को नई पहचान दिलाने का काम किया है।"