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पाटीदारों को रिझाने राजकोट पहुंचे मोदी, बोले- 40 साल बाद आया है कोई PM

Thu, 29 Jun 2017 10:04 PM IST
amarujala.com- Written by: मुकेश झा
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पीएम मोदी - फोटो : SELF
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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के राजकोट में रोड शो किया। रोड शो  में भारी भीड़ रही। इससे पहले साबरमती आश्रम की 100वीं वर्षगांठ के मौके पर कहा कि देश में जिस तरह की हिंसा हो रही है उसे बंद होनी चाहिए। बता दें कि 6 महीने में प्रधानमंत्री मोदी चौथी बार गुजरात के दौरे पर पहुंचे हैं। वहीं, बात की जाए तो 2014 में प्रधानमंत्री पद की शपथ लेने के बाद अब तक वो 13वीं बार गुजरात का दौरा कर चुके हैं।
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राजकोट में बोले पीएम मोदी : 1947 से लेकर साल 2013 तक मात्र 55 कार्यक्रम पूरे देश में आयोजित किए गए: पीएम मोदी हमारी सरकार ने तीन साल के भीतर पूरे देश में 5500 कार्यक्रम किए: पीएम मोदी  दिव्यांगों के लिए मोदी सरकार ने कई अहम फैसले लिए: पीएम मोदी राजकोट की मेरे दिल में खास जगह है: पीएम मोदी दिव्यांग बच्चों को विशेष सुविधा मिलनी चाहिए: पीएम मोदी मोदी सरकार देश के गरीबों को समर्पित हैं: पीएम मोदी 40 साल बाद राजकोट कोई पीएम आया है, 40 साल पहले मोरारजी देसाई है: पीएम मोदी ये सरकार गरीबों को समर्पित हैं, देश में करोड़ों में दिव्यांग जन है: पीएम मोदी जिस परिवार में ये संतान जन्म लेता है, ज्यादतर उस परिवार के जिम्मे ही लालन-पालन होता है: पीएम मोदी मैंने  ऐसे कई परिवार देखे हैं, पहले संतान ही विकलांग है, फिर सबकुछ न्योछावर कर देते हैं : पीएम मोदी ऐसे परिवार लाखों इस देश में हैं: पीएम मोदी दिव्यांगों की जिम्मेदारी एक परिवार की नहीं, बल्कि समाज का है: पीएम मोदी देश में करोड़ों की तादात में दिव्यांग हैं। दुर्भाग्य से अधिकतम दिव्यांग जिस परिवार में जन्म लेते हैं ज्यादातर उस परिवार के जिम्मे ही उनका लालन-पालन होता है: पीएम मोदी
गौरतलब है कि इस साल के अंत में गुजरात में विधानसभा चुनाव होनेवाले हैं। जहां एक तरफ भाजपा अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कोई कोर कसर नहीं छोड़ना चाहती है तो दूसरी तरफ ऐसा कयास लगाया जा रहा है कि पीएम के दौरे से पार्टी को एक नई ऊर्जा देने की कोशिश की जा रही है। 
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वहीं, गुजरात में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को भी मनाने की शायद कोशिश की जा रही हो, क्योंकि पटेल समूदाय का वोट बैंक काफी ज्यादा है और इस साल के अंत में  विधानसभा चुनाव भी है।

गुजरात में पाटीदार समाज द्वारा किये जा रहे लगातार प्रदर्शन और उना कांड के बाद दलितों द्वारा शुरू की गई स्वाभिमान की लड़ाई ने राज्य सरकार के सामने मुसीबतें खड़ी कर दी तो वहीं आनंदीबेन की कार्यशैली पर भी तमाम सवाल उठने लगे थे। जिसके बाद से सरकार को गुजरात में काफी कठिनाई का सामना करना पड़ा है।

पटेल आरक्षण और दलितों के विरोध प्रदर्शन के बाद सरकार विरोधी आवाजों को बंद करवाने के चलते आनंदीबेन ने अपनी उम्र का हवाला देकर मुख्यमंत्री पद छोड़ने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद अमित शाह के सहयोगी और पीएम के करीबी विजय रुपानी को गुजरात का सीएम बनाया गया।
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एक नजर पटेल आंदोलन पर...

हार्दिक पटेल
जुलाई 2015 में शुरू हुआ ये वो आंदोलन है जो पाटीदार समाज को गुजरात में सरकारी नौकरियों और अन्य जगहों पर ओबीसी का स्टेटस चाहते हैं। गुजरात में 27 प्रतिशत सीटें ओबीसी के लिये रिजर्व हैं। वहीं, अनुसूचित जाति वर्ग के लिये 15 प्रतिशत, जनजाति के लिये 49.5 प्रतिशत सीटें आरक्ष‍ित हैं। जबकि सुप्रीम कोर्ट ने 1992 से अध‍कितम 50 प्रतिशत तक के आरक्षण की सीमा निर्धारित कर रखी है।

वहीं, बीते कुछ दिन पहले हुए गुजरात के स्थानीय निकाय के चुनावो में बीजेपी ने छह के छह नगर निगम चुनाव जीतकर शहरी वोटरो को अपनी ओर खींचने में सफल हुई तो वहीं ग्रामीण इलाकों में कांग्रेस को खूब वोट मिले। इसका कारण यह बताया गया कि पाटीदार आरक्षण के मुद्दे ने बीजेपी को ग्रामीण इलाकों में सत्ता से उखाड़ फेंका, जिसका सीधा फायदा कांग्रेस को हुआ। यहां तक कि नगर निगमों में भी कांग्रेस के वोट बैंक में काफी नहीं तो कुछ इजाफा तो जरूर हुआ है। इन नतीजों को 2017 के विधानसभा चुनावो से पहले के ट्रेलर के तौर पर देखा जा रहा है। गौरतलब हो कि 182 विधानसभा सीटों वाली गुजरात विधानसभा में 35 विधायक पटेल समुदाय से हैं। 

मालूम हो कि भारतीय जनता पार्टी ने मोदी की अगुवाई में लड़े पिछले गुजरात विधानसभा चुनाव में 128 सीटों पर शानदार जीत हासिल की थी।
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