प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने दूसरे कार्यकाल में आज रविवार को पहली बार ‘मन की बात’ कार्यक्रम के जरिए देश को संबोधित किया। भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री के इस कार्यक्रम के जरिए एक बार फिर लोगों से जुड़ने की प्रक्रिया शुरू कर दी। पार्टी के अनेक शीर्ष नेताओं ने अलग-अलग जगह पर जनता के साथ पीएम के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुना और उस पर अपने विचार साझा किए।
भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने दिल्ली के द्वारका क्षेत्र के ककरोला स्टेडियम में जनता के साथ कार्यक्रम को सुना। उनके साथ दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी और सांसद प्रवेश वर्मा भी इस कार्यक्रम में शामिल हुए, जबकि पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने अजमल खां पार्क में कार्यक्रम सुना। इस तरह भाजपा ने इसे एक जनता का कार्यक्रम बनाने की कोशिश की।
पानी का मुद्दा दिल्ली की राजनीती में अहम
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज के मन की बात कार्यक्रम में देश में बढ़ते जल संकट का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि हम वर्षा का केवल आठ फीसदी पानी ही संचित कर पाते हैं। अगर जल संग्रह की क्षमता बढ़ा ली जाए तो इससे जल संकट से निबटा जा सकता है। पीएम मोदी ने देश के लोगों से जल के बचत को स्वच्छता अभियान की तरह एक आन्दोलन बनाने की अपील भी की। जल संकट से निबटने के लिए केंद्र सरकार ने पहले ही ‘जल शक्ति मंत्रालय’ स्थापित कर इसे अपनी प्रमुखता में शामिल कर लिया है।
केंद्र सरकार ने वर्ष 2024 तक देश के सभी घरों में ‘नल से जल’ पहुंचाने का एक बड़ा लक्ष्य भी निर्धारित किया है। दरअसल, दिल्ली में जल संकट एक गंभीर मुद्दा है। दिल्ली जल बोर्ड के द्वारा लगभग 81 फीसदी जनता तक ही पानी पहुंचाया जाता है, जबकि 19 फीसदी आबादी अभी भी पानी की सुविधा से महरूम है। पानी के इस संकट का फायदा स्थानीय पानी माफिया उठाते हैं जो टैंकरों के जरिए पानी पहुंचाकर काली कमाई करते हैं। अलग-अलग इलाकों में एक टैंकर पानी की कीमत 600 रुपये से लेकर 1200 रुपये तक है। जाहिर है यह लोगों की एक बड़ी समस्या है जो आने वाले विधानसभा चुनाव में बड़ा मुद्दा बन सकती है।
दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार ने भी राजधानी में पानी की उपलब्धता के लिए कई ठोस कदम उठाने का दावा किया है। केजरीवाल सरकार का दावा है कि उसके आने के बाद राजधानी में पानी की उपलब्धता सुधरी है। सरकार ने हाल ही में 599 करोड़ रुपये की लागत से चंद्रावल एरिया में नया वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाया है जो लगभग चौबीस लाख लोगों के लिए जल उपलब्ध कराने के लिए पर्याप्त होगा। यह प्लांट लगभग तीन साल बाद काम करना शुरू कर देगा। दिल्ली सरकार ने भी राजधानी के हर घर तक टोंटी से जल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।