प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने अपनी कविता में कहा है- ''एक खिलौना बच्चों को खुशियों की अनंत दुनिया में ले जाता है। खिलौना का एक-एक रंग बच्चे के जीवन में कितने ही रंग बिखेरता है।''
खिलौनों के वैज्ञानिक पक्ष समझने की जरूरत
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि हमारी परंपराओं, खानपान, और परिधानों में ये विविधतायें एक ताकत के रूप में नजर आती है। इसी तरह भारतीय खिलौना उद्योग भी इस यूनिक इंडियन पर्स्पेक्टिव को भारतीय विचारबोध को प्रोत्साहित कर सकती हैं। खिलौनों का जो वैज्ञानिक पक्ष है, बच्चों के विकास में खिलौनों की जो भूमिका है, उसे अभिभावकों को समझना चाहिए और अध्यापकों को स्कूलों में भी उसे प्रयोग करना चाहिए। इस दिशा में देश भी प्रभावी कदम उठा रहा है, व्यवस्था में जरूरी कदम उठा रहा है।
खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया
नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति में प्ले-आधारित और गतिविधि-आधारित शिक्षा को बड़े पैमाने पर शामिल किया गया है। ये ऐसी शिक्षा व्यवस्था है, जिसमें बच्चों में पहेलियों और खेलों के माध्यम से तार्किक और रचनात्मक सोच बढ़े, इस पर विशेष ध्यान दिया गया है। पीएम ने कहा कि देश ने खिलौना उद्योग को 24 प्रमुख क्षेत्रों में दर्जा दिया है। नेशनल टॉय एक्शन प्लान भी तैयार किया गया है। इसमें 15 मंत्रालयों और विभागों को शामिल किया गया है ताकि ये उद्योग प्रतिस्पर्धी बने, देश खिलौनों में आत्मनिर्भर बनें और भारत के खिलौने दुनिया में जाएं।
हैंड मेड इन इंडिया की डिमांड
पीएम मोदी ने कहा कि आज खिलौना मेला के इस अवसर पर हम सभी की जिम्मेदारी है कि हम इस ऊर्जा को आधुनिक अवतार दें, इन संभावनाओं को साकार करें। अगर आज मेड इन इंडिया की डिमांड है, तो आज हैंड मेड इन इंडिया की डिमांड भी उतनी ही बढ़ रही है।