प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रविवार को जनऔषधि दिवस को संबोधित कर रहे हैं। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए प्रधानमंत्री मोदी शिलांग में इस कार्यक्रम को संबोधित कर रहे हैं। इसी के साथ 7500वें जनऔषधि केंद्र का भी उद्घाटन किया।
जनऔषधि केंद्र से दवाइयां खरीदने की अपील- पीएम
पीएम मोदी ने कहा कि जनऔषधि योजना के लाभार्थी का जवाब देते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि दवाइयां महंगी हो रही हैं, इसलिए हमने प्रधानमंत्री जनऔषधि योजना का शुभारंभ किया। इस योजना के लाभ से गरीबों के पैसे बचे। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मेरी लोगों से अपील है कि ज्यादा से ज्यादा दवाइयां प्रधानमंत्री जनऔषधि से खरीदें।
जनऔषधि योजना सेवा और रोजगार दोनों का माध्यम
पीएम मोदी ने कहा कि जन औषधि योजना को देश के कोने-कोने में चलाने वाले और कुछ लाभार्थियों से आज मुझे बात करने का अवसर मिला और जो चर्चा हुई है, उसमें स्पष्ट हुई है कि ये योजना गरीब और विशेष रूप से मध्यम वर्गीय परिवारों की बहुत बड़ी साथी बन रही है। जन औषधि योजना सेवा और रोजगार दोनों का माध्यम बन रही है। जन औषधि केंद्रों में सस्ती दवाई के साथ-साथ युवाओं को आय के साधन मिल रहे हैं।
ये योजना महिलाओं को आत्मनिर्भर बना रही है - पीएम
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि 1,000 से ज्यादा जन औषधि केंद्र तो ऐसे हैं, जिन्हें महिलाएं ही चला रही हैं। यानी ये योजना बेटियों की आत्मनिर्भरता को भी बल दे रही है। इस योजना से पहाड़ी क्षेत्रों में, नॉर्थईस्ट में, जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले देशवासियों तक सस्ती दवा देने में मदद मिल रही है। आज 7,500वे केंद्र का लोकार्पण किया गया है तो वो शिलांग में हुआ है।
'मेड इन इंडिया दवाइंयों की मांग बढ़ी है'
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा कि 7500 के पड़ाव तक पहुंचना इसलिए भी अहम है, क्योंकि छह साल पहले देश में ऐसे 100 केंद्र भी नहीं थे। हम जितना जल्दी हो सके, उतना जल्दी 10,000 का लक्ष्य पूर्ण करना चाहते हैं। इस योजना से फार्मा सेक्टर में संभावनाओं का एक नया आयाम भी खुला है। आज मेड इन इंडिया दवाइयां और सर्जिकल्स की मांग भी बढ़ी हैं। मांग बढ़ने से उत्पादकता भी बढ़ी है, जिससे बड़ी संख्या में रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। जरूरी दवाओं को, हार्ट स्टेंट्स को, नी सर्जरी से जुड़े उपकरणों की कीमत को कई गुना कम कर दिया गया है।
आज मोटे अनाजों को ना सिर्फ प्रोत्साहित किया जा रहा है बल्कि अब भारत की पहल पर संयुक्त राष्ट्र ने वर्ष 2023 को इंटरनेशनल ईयर ऑफ मिलेट्स भी घोषित किया है। मिलेट्स पर फोकस से देश को पौष्टिक अन्न भी मिलेगा और हमारे किसानों की आय भी बढ़ेगी।