इस योजना की शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 29 मई 2021 को की गई थी। इसका उद्देश्य कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो देने वाले बच्चों की व्यापक देखपाल और सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 30 मई (आज) को पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन योजना के तहत लाभ जारी करेंगे। कोरोना महामारी में अपने माता-पिता को खो देने वाले स्कूली बच्चों को छात्रवृत्ति हस्तांतरित करेंगे। इस दौरान आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत हेल्थ कार्ड की पासबुक बच्चों को सौंपी जाएगी।
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क्या है इस योजना का उद्देश्य
इस योजना के जरिए अनाथ बच्चों को शिक्षा के माध्यम से सशक्त बनाना है और 23 वर्ष की आयु तक वित्तीय सहायता के साथ आत्मनिर्भर बनाना है। इस योजना के लिए जिला बाल संरक्षण इकाइयों और नागरिक समाज के सदस्यों की सहायता से उपायुक्तों द्वारा बच्चों की पहचान की गई है। इन बच्चों के माता-पिता की मृत्यु के कारण का उचित सत्यापन के बाद पीएम केयर्स फॉर चिल्ड्रन पोर्टल पर विवरण अपलोड किया गया था। महिला एवं बाल विकास विभाग, डाक विभाग, सामाजिक न्याय और आधिकारिता, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि विभागों के सहयोग से योजना के क्रियान्वयन के लिए नोडल विभाग है और जिला स्तर पर उपायुक्त नोडल प्राधिकारी हैं।
किस्तों में दी जाएगी खाते में रकम
योजना के तहत दिए जाने वाले दस लाख रुपये बच्चों के खातों में किस्तों में डाले जाएंगे। हर उम्र व कक्षा के अनुसार किस्त तय की गई है। 18 वर्ष की आयु होने पर पूरी रकम खाते में जमा होने के बाद राशि का बच्चे के नाम पर निवेश किया जाएगा और 23 साल की उम्र तक बच्चे को अपना खर्च चलाने के लिए हर महीने निर्धारित रकम दी जाएगी।