एससी-एसटी एक्ट के प्रावधानों में बदलाव पर चुप्पी साधने के आरोपों के बीच पीएम नरेंद्र मोदी ने विपक्ष को भीमराव आंबेडकर के नाम पर राजनीति न करने की नसीहत दी है। बुधवार को यहां एक कार्यक्रम में पीएम ने विपक्ष पर आंबेडकर के नाम का महज सियासी इस्तेमाल करने का आरोप लगाया और कहा कि इस सरकार ने आंबेडकर का सम्मान बढ़ाने के लिए जितना काम किया है उतना किसी ने नहीं किया होगा। एक्ट के प्रावधानों में बदलाव पर बवाल के बीच पहली बार पीएम ने परोक्ष टिप्पणी की है।
पीएम ने कहा कि आंबेडकर को राजनीति में घसीटने के बदले उनके दिखाए रास्ते पर चलने की जरूरत है। पूर्व की यूपीए सरकार के दौरान संविधान निर्माता आंबेडकर के नाम पर सिर्फ राजनीति की गई। पीएम ने वाजपेयी सरकार के आंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र की स्थापना की योजना को यूपीए सरकार द्वारा ठंडे बस्ते में डालने का आरोप लगाया।
पीएम ने कहा कि इस मामले में यूपीए सरकार के कार्यकाल में कुछ नहीं हुआ। उन्होंने इस केंद्र के शिलान्यास के दौरान ही इसका चार साल में लोकार्पण की बात कही थी। अब आंबेडकर के जन्म दिवस की पूर्व संध्या पर नई दिल्ली में उनके जन्म स्थान 26, अलीपुर रोड को राष्ट्र को समर्पित कर दिया जाएगा। पीएम ने कहा कि आंबेडकर महान हस्ती थे। हम बंधुता के महात्म्य को छोड़ कर आगे नहीं बढ़ सकते।
हम लोग आंबेडकर के नाम पर राजनीति करने के बदले आखिरी छोर पर बैठे लोगों के लिए जीने मरने वाले लोग हैं क्योंकि महात्मा गांधी ने हमें यही रास्ता दिखाया है। सरकार आंबेडकर-महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलने के साथ ही उनके सपनों का भारत के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रही है। गौरतलब है कि एक्ट में बदलाव के खिलाफ हुए आंदोलन में 12 लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। खासतौर पर कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस मुद्दे पर चुप्पी के लिए पीएम मोदी पर निशाना साधा था।