प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए एक समाचार पत्र के स्वर्ण जयंती समारोह के उद्घाटन कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान प्रधानमंत्री ने कहा कि सेन डेका (समाचार पत्र के संपादक) के नेतृत्व में अखबार ने राष्ट्रहित को सर्वोपरि रखा और आपातकाल के दौरान भी जब लोकतंत्र पर सबसे बड़ा हुआ तब भी अखबार और डेका ने पत्रकारीय मूल्यों से समझौता नहीं किया।
असम में बाढ़ और बचाव व राहत कार्यों पर क्या कहा
मोदी ने कहा, "बीते कुछ दिनों से असम बाढ़ के रूप में बड़ी चुनौती और कठिनाइयों का सामना भी कर रहा है। असम के अनेक जिलों में सामान्य जीवन बहुत अधिक प्रभावित हुआ है। हिमंत जी (असम के मुख्यमंत्री) और उनकी टीम राहत और बचाव के लिए दिन-रात मेहनत कर रही है।"
उन्होंने आगे कहा कि इसको लेकर समय-समय पर बातचीत होती रहती है। उन्होंने असम के लोगों और अखबार के पाठकों को भरोसा दिलाते हुए कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर उनकी मुश्किलें कम करने में जुटी हैं।
जन आंदोलन की बदौलत विकास की नई गाथा लिख रहा असम
प्रधानमंत्री ने कहा कि अखबार के पिछले 50 वर्षों की यात्रा, असम में हुए बदलाव की कहानी बताती है। जन आंदोलनों ने इस बदलाव को साकार करने में अहम भूमिका निभाई है। जन आंदोलनों ने असम की सांस्कृतिक विरासत और असमिया गौरव की रक्षा की और अब जन भागीदारी की बदौलत असम विकास की नई गाथा लिख रहा है।
स्वच्छ भारत जैसे अभियान में मीडिया ने निभाई सकारात्मक भूमिका
मोदी ने कहा, "स्वच्छ भारत मिशन जैसे अभियान में हमारे मीडिया ने जो सकारात्मक भूमिका निभाई है, उसकी पूरे देश और दुनिया में आज भी सराहना होती है। इसी तरह अमृत महोत्सव में देश के संकल्पों में भी आप भागीदार बन सकते हैं।"
उन्होंने कहा कि पिछले 8 वर्षों से असम और पूरे उत्तर पूर्व को आधुनिक कनेक्टिविटी के हिसाब से जोड़ने का अभूतपूर्व प्रयास चल रहा है। इससे असम और उत्तर पूर्व की भारत की वृद्धि में भागीदारी लगातार बढ़ रही है।
असम में बाढ़ के हालात में सुधार
असम में बुधवार को बाढ़ के हालात में सुधार हुआ। हालांकि, बाढ़ संबंधी घटनाओं में दो और लोगों की मौत हो गई। बाढ़ से अब तक 186 लोगों की जान जा चुकी है और 15 जिलों के 9.68 लाख से अधिक लोग अभी भी बाढ़ से प्रभावित हैं। मंगलवार तक 16 जिलों के 11.17 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित थे।