मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400
पूर्व विदेश सचिव शशांक कहते हैं, 1962 की तरह रूस तटस्थ नहीं है। ऐसे तनाव में भी रूस ने भारत को जल्द से जल्द मिसाइल रक्षा प्रणाली एस-400 की आपूर्ति की बात कही है। फ्रांस राफेल की खेप जल्द से जल्द देना सुनिश्चित कर रहा है। जापान, जर्मनी, अमेरिका इस तनाव के लिए सीधे चीन को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। भारत को घेरने वाला नेपाल घरेलू मोर्चे पर खुद बुरी तरह उलझ गया है।
नरेंद्र मोदी-शी जिनपिंग
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मोदी की यात्रा से क्या हासिल होगा? दौरे के साथ, भारत ने विवाद सुलझाने की गेंद चीन के पाले में डाल दी है। वह भी इस संदेश के साथ कि भारत रत्तीभर भी पीछे नहीं हटेगा। यदि चीन नहीं माना तो भारत की आक्रामक मुहिम और बढ़ेगी।
खुद घरेलू मोर्चे पर आर्थिक सहित कई चुनौतियों से दो-चार चीन युद्ध नहीं कर सकता। यदि वह लद्दाख सीमा पर उग्रता दिखाता है तो हम मुंहतोड़ जवाब दे सकते हैं। सैनिकों का हौसला बढ़ाने में प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा बड़ा कदम साबित होगी।
हांगकांग में प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार किया गया
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