वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 23-25 मई तक दावोस में विश्व आर्थिक मंच में मंत्रियों, मुख्यमंत्रियों और उद्योग जगत के नेताओं के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे। वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय ने कहा कि यह आयोजन वैश्विक कथा को आकार देने में एक महत्वपूर्ण और प्रासंगिक हितधारक के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करने में मदद करेगा, खासकर जब भारत 2023 में जी -20 की अध्यक्षता करेगा। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम भी भारत को अपने मजबूत आर्थिक विकास और स्थिर मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों के मद्देनजर एक आकर्षक निवेश गंतव्य के रूप में पेश करने का एक मंच होगा।
छह राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री भी शामिल होंगे
भारत सरकार के प्रतिनिधिमंडल में स्वास्थ्य मंत्री मनसुखलाल मंडाविया, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मध्य प्रदेश, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और तेलंगाना के छह राज्यों के मुख्यमंत्री और वरिष्ठ मंत्री शामिल होंगे। इसमें कहा गया है कि हरि एस भारतीय, अमित कल्याणी, राजन भारती मित्तल, रोनी स्क्रूवाला और सलिल एस पारेख सहित कई वरिष्ठ उद्योग जगत के नेता भी डब्ल्यूईएफ विचार-विमर्श में भाग लेंगे। देश की आजादी के 75 साल और 'आजादी का अमृत महोत्सव' को चिह्नित करने के लिए मंत्रालय ने डब्ल्यूईएफ में भारत यादगार उपस्थिति की पहल की है। इंडिया लाउंज के साथ-साथ एक स्टेट लाउंज भी स्थापित किया गया है।
भारत सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप, भारत के सामरिक लाभ, मौजूदा और आगामी प्रोत्साहन वास्तुकला, उद्योग निवेश क्षमता और बाजार के अवसरों को ध्यान में रखते हुए इंडिया लाउंज में सत्र आयोजित किए जा रहे हैं। सत्रों के दौरान जिन प्रमुख विषयों पर ध्यान दिया जाएगा। इनमें नीति और व्यवसाय करने में आसानी, सुधार, ऊर्जा ट्रांजिशन, डिजिटल अर्थव्यवस्था, राष्ट्रीय मुद्रीकरण में अवसर, स्टार्टअप, डिजिटल स्पेस में बढ़ती प्रतिभा, स्वास्थ्य सेवा पारिस्थितिकी तंत्र में नवाचार और अनुसंधान पर जोर शामिल हैं। यात्रा से पहले गोयल ने गुरुवार को भारत के प्रतिनिधिमंडल के साथ ब्रीफिंग सत्र आयोजित किया।
कोरोना, युद्ध जैसे संकट से निपटने में चूक पर 5 फीसदी तक घट सकती है वैश्विक विकास दर
जलवायु परिवर्तन, महामारी और रूस-यूक्रेन युद्ध जैसे संकटों से निपटने की क्षमता विकसित करने में चूकने पर वैश्विक विकास दर में एक से 5 फीसदी तक गिरावट आ सकती है। विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) ने शुक्रवार को एक शोध में कहा, इन संकटों से दुनियाभर में भूखमरी, विस्थापन, असमानता, आपूर्ति श्रृंखला में बाधा, ऊर्जा कीमतों में बढ़ोतरी और वैश्विक वृद्धि पर दबाव जैसी बाधाएं पैदा हो रही हैं।
अगले संकट से निपटने के लिए देशों व कंपनियों को भी जोखिम प्रबंधन के लिए बेहतर तरीके से काम करने की जरूरत है। दावोस में होने वाली डब्ल्यूईएफ की सालाना बैठक से पूर्व जारी इस शोध में कहा गया कि कोरोना के कारण कार्यबल में छंटनी से कुछ देशों में वृद्धि 3.6 फीसदी तक प्रभावित हुई। ऊर्जा संकट और आपूर्ति बाधित होने से वैश्विक जीडीपी को एक से 2.5 फीसदी तक नुकसान हुआ। डब्ल्यूईएफ के अध्यक्ष बोर्गे ब्रेंडे ने कहा, मौजूदा पीढ़ी के लिए क्षमता को और अधिक लचीला बनाना जरूरी है।