वित्तमंत्री अरुण जेटली जालंधर में एक कार्यक्रम के दौरान
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सरकार की आय घोषणा स्कीम के तहत देश के 64,275 लोगों और फर्मों ने 65,250 करोड़ रुपये के काले धन का खुलासा किया है। इससे सरकार को टैक्स और जुर्माने के तौर पर 29,362 करोड़ रुपये हासिल होंगे। औसत खुलासा एक करोड़ रुपये का है। देश में काले धन की अब तक यह सबसे बड़ी घोषणा है।
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने शनिवार को एक प्रेस कांफ्रेंस में आय घोषणा स्कीम (आईडीएस) के तहत घोषित काले धन की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह अनुमानित आंकड़ा है। 30 सितंबर को खत्म हुई योजना के बाद जब अंतिम तौर पर ऑनलाइन रिटर्न और मैनुअल फाइलिंग का हिसाब होगा तो यह रकम इससे भी ज्यादा हो सकती है।
आईडीएस के तहत घोषित रकम का खुलासा करते करते हुए जेटली ने कहा कि इस मामले में पूरी गोपनीयता बरती जाएगी। हम ब्लैकमनी की घोषणा करने वालों के नाम उजागर नहीं करेंगे। इस मद में हासिल टैक्स और जुर्माने की रकम भारत की समेकित निधि में जाएगी और यह लोगों के कल्याण पर खर्च होगी।
बहरहाल, अब तक की फाइलिंग से इस वित्त वर्ष में सरकार को टैक्स के तौर पर 14,700 करोड़ रुपये मिलेंगे। सरकार ने काला धन रखने वालों को अपनी संपत्ति के खुलासे के लिए वन टाइम चांस दिया था। जिन लोगों ने अपने काले धन का खुलासा किया है, उन्हें रकम का 45 फीसदी टैक्स और जुर्माने के तौर पर चुकाना पड़ा है। कुल मिलाकर अब तक सरकार को इस मद में 29362 करोड़ रुपये हासिल होने वाले हैं। आधी रकम यानी 14,681.25 करोड़ रुपये इसी वित्त वर्ष में मिलेंगे। वित्त मंत्री ने कहा कि आयकर विभाग की ओर से छापे-सर्च-ऑपरेशन के दौरान 56378 करोड़ रुपये की बेनामी संपत्ति का खुलासा हुआ है।
पिछले साल विदेश में जमा काले धन की घोषणा से जुड़ी स्कीम के तहत 644 लोगों ने अनाम विदेशी जगहों पर जमा धन का खुलासा किया था। सरकार को इससे टैक्स के तौर पर 2,428 करोड़ रुपये मिले थे। वर्ष 1997 में तत्कालीन पी. चिदंबरम ने स्वैच्छिक आय घोषणा स्कीम यानी वीडीआईएस लांच की थी और इससे सरकार को टैक्स के तौर पर 9,760 करोड़ रुपये की कमाई हुई थी। जेटली ने कहा कि वीडीआईएस और आईडीएस की तुलना नहीं हो सकती क्योंकि दोनों स्कीमें अलग हैं। आईडीएस माफी योजना नहीं है। जबकि वीडीआईएस माफी योजना थी। आईडीएस के तहत 45 फीसदी टैक्स लगाया गया। जबकि वीडीआईएस में एक अंक की दर से टैक्स लगाया गया था।