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Pension: ओपीएस पर केंद्रीय गृह मंत्री ने जिस कमेटी का जिक्र किया, उसमें पुरानी पेंशन नहीं, बल्कि NPS लिखा है

जितेंद्र भारद्वाज
Updated Fri, 24 Nov 2023 03:24 PM IST

सार

केंद्रीय गृह मंत्री शाह से एक प्रेसवार्ता के दौरान ओपीएस को लेकर सवाल पूछा गया था। उस बाबत शाह ने कहा, इस विषय में एक कमेटी बनाई गई है। उस पर काम हो रहा है। कमेटी की रिपोर्ट आने के बाद उस पर विचार किया जाएगा...
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Pension: Home Minister Amit Shah - फोटो : Amar Ujala/Rahul Bisht


एनपीएस में सुधार करने के लिए कमेटी गठित

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोकसभा में पुरानी पेंशन के मुद्दे पर एक कमेटी गठित करने की घोषणा की थी। वित्त मंत्रालय ने छह अप्रैल को वित्त सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन कर दिया। इस कमेटी में कार्मिक, लोक शिकायत व पेंशन मंत्रालय के सचिव, व्यय विभाग के विशेष सचिव और पेंशन फंड नियमन व विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) के अध्यक्ष को बतौर सदस्य, शामिल किया गया। कमेटी से कहा गया है कि वह नई पेंशन स्कीम 'एनपीएस' के मौजूदा फ्रेमवर्क और ढांचे के संदर्भ में बदलावों की सिफारिश करे। किस तरह से नई पेंशन स्कीम के तहत 'पेंशन लाभ' को और ज्यादा आकर्षक बनाया जाए, इस बाबत सुझाव दें। कार्यालय ज्ञापन में कमेटी से यह भी कहा गया कि वह इस बात का ख्याल रखें कि उसके सुझावों का आम जनता के हितों व बजटीय अनुशासन पर कोई विपरीत असर न हो। खास बात ये रही कि दो पन्नों के कार्यालय ज्ञापन में कहीं पर भी 'ओपीएस' नहीं लिखा था। उसमें केवल एनपीएस का जिक्र था।



18 साल बाद कर्मी को मिली इतनी पेंशन

ओपीएस के लिए गठित नेशनल ज्वाइंट काउंसिल ऑफ एक्शन (एनजेसीए) की संचालन समिति के वरिष्ठ सदस्य और एआईडीईएफ के महासचिव सी. श्रीकुमार का कहना है कि एनपीएस में कर्मियों जो पेंशन मिल रही है, उतनी तो बुढ़ावा पेंशन ही है। एनपीएस में शामिल कर्मी, 18 साल बाद रिटायर हो रहे हैं, उन्हें क्या मिला है। एक कर्मी को एनपीएस में 2417 रुपये मासिक पेंशन मिली है, दूसरे को 2506 रुपये और तीसरे कर्मी को 4,900 रुपये प्रतिमाह की पेंशन मिली है। अगर यही कर्मचारी पुरानी पेंशन व्यवस्था के दायरे में होते तो उन्हें प्रतिमाह क्रमश: 15250 रुपये, 17150 रुपये और 28450 रुपये मिलते। एनपीएस में कर्मियों द्वारा हर माह अपने वेतन का दस फीसदी शेयर डालने के बाद भी उन्हें रिटायरमेंट पर मामूली सी पेंशन मिलती है। देश में सरकारी कर्मियों, पेंशनरों, उनके परिवारों और रिश्तेदारों को मिलाकर वह संख्या दस करोड़ के पार पहुंच जाती है। अगर ओपीएस लागू नहीं होता है, तो लोकसभा चुनाव में भाजपा को राजनीतिक नुकसान झेलना होगा। कांग्रेस पार्टी ने ओपीएस को अपने चुनावी एजेंडे में शामिल किया है। कर्नाटक और हिमाचल प्रदेश की जीत में ओपीएस की बड़ी भूमिका रही है।

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