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पेगासस मामला: 'पंखों वाला घोड़ा' है यह स्पाईवेयर, चिदंबरम की वैष्णव को फोन की फॉरेंसिक जांच कराने की सलाह

सार

चिदंबरम ने कहा, पेगासस, इस्राइल में एनएसओ समूह के स्वामित्व वाला एक सॉफ्टवेयर अब भारत सरकार की सेवा में है। जब भी जरुरत होती है, सरकार को किसी की 'गिरफ्तारी और हिरासत' को संभव बनाने की शक्ति प्रदान कर देता है। यह अच्छे दिनों की यात्रा को भी नेविगेट करता है...
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पी चिदंबरम और अश्विनी वैष्णव - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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'पेगासस स्पाईवेयर' को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विरोध के स्वर तेज होते जा रहे हैं। पूर्व केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम अब इस मामले में कूद पड़े हैं। उन्होंने बहुत ही सधे हुए अंदाज में 'पेगासस' के मुद्दे पर केंद्र सरकार को घेरने का प्रयास किया है। चिदंबरम ने पेगासस को पौराणिक कथाओं से जोड़ दिया। ग्रीक पौराणिक कथाओं में पेगासस, पंखों वाला घोड़ा है, जो मेडुसा के खून से निकला है। यह जीउस का नौकर बन गया। उसे जब भी आवश्यकता होती, वह 'गड़गड़ाहट और बिजली' ले आता। पेगासस एक रहस्यमय प्राणी था। वह 'हर चीज में सक्षम था। वह कुछ हद तक 'मोदी है तो मुमकिन है' के नारे जैसा था। पूर्व गृह मंत्री ने मौजूदा इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री अश्विनी वैष्णव को सलाह दी है कि वे अपने फोन की फोरेंसिक जांच करा लें।

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चिदंबरम ने इस मामले में कई ट्वीट किए हैं। उन्होंने मौजूदा आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव को सलाह भी दे दी है। पूर्व गृह मंत्री ने लिखा, क्या मंत्री अपने फोन (प्रासंगिक अवधि के दौरान प्रयुक्त) को, यह पता लगाने के लिए कि वह हैक किया गया है या नहीं, फॉरेंसिक जांच के लिए भेजेंगे। अश्विनी वैष्णव ने कहा था, ऐसी सेवाएं किसी के लिए, कहीं भी और कभी भी खुले तौर पर उपलब्ध हैं। आमतौर पर पेगासस सॉफ्टवेयर जैसी सेवाएं सरकारी एजेंसियों के साथ-साथ दुनियाभर में निजी कंपनियों द्वारा उपयोग की जाती हैं।

यहां चिदंबरम ने लिखा, मुझे डर है, कहीं वे ग्रीक पौराणिक कथाओं से प्रेरित तो नहीं हैं। एनएसओ समूह ने स्पष्ट रूप से कहा था कि वह अपनी तकनीक को पूरी तरह से कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों और सरकारों की खुफिया एजेंसियों को बेचता है। एनएसओ ग्रुप का यह बयान सार्वजनिक है। इस समूह ने खुले तौर पर उपलब्ध सेवाओं का संदर्भ एचएलआर लुकअप सेवाओं के लिए करने की बात कही थी, न कि पेगासस के लिए। अगर पेगासस केवल जांच-परख वाली सरकारों को बेचा जाता है, तो यहां पर एक आसान सा सवाल उठता है कि क्या उनमें भारत सरकार ऐसी ही एक सत्यापित सरकार थी।

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चिदंबरम ने कहा, पेगासस, इस्राइल में एनएसओ समूह के स्वामित्व वाला एक सॉफ्टवेयर अब भारत सरकार की सेवा में है। जब भी जरुरत होती है, सरकार को किसी की 'गिरफ्तारी और हिरासत' को संभव बनाने की शक्ति प्रदान कर देता है। यह अच्छे दिनों की यात्रा को भी नेविगेट करता है। उन्होंने आईटी मंत्री के बारे में कहा, दुर्लभ उदारता और क्षमा का प्रदर्शन करते हुए मंत्री, जासूसी के आरोप के खिलाफ सरकार का बचाव करने के लिए उठ रहे हैं। उनका बचाव अनुमानित था। अगर कोई 'तर्क के चश्मे' से देखता है, तो कोई 'अनधिकृत निगरानी' नहीं थी। आईआईटी, कानपुर और व्हार्टन बिजनेस स्कूल के एक पूर्व छात्र से रक्षा की उम्मीद की जा सकती है, मगर ऐसे त्रुटिहीन तर्क का खंडन करना मुश्किल है। क्या इस बात का सबूत है कि पेगासस स्पाइवेयर भारत में घुसपैठ कर गया था। क्या सरकार या उसकी किसी एजेंसी ने पेगासस स्पाइवेयर का अधिग्रहण किया था। इस स्पाईवेयर को प्राप्त करने के लिए भुगतान की गई राशि क्या थी। प्रत्येक डिवाइस में सॉफ़्टवेयर स्थापित करने के लिए कितनी राशि का भुगतान किया गया था। देश के इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री को इन सवालों का जवाब देना चाहिए।

यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि नए मंत्री को अपनी पारी की शुरुआत चिपचिपे विकेट पर करनी पड़ी, लेकिन मंत्री को जवाब देना चाहिए। भारत सरकार ने अश्वमेध यज्ञ करने वाले प्राचीन भारत के वीर राजाओं द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले भारतीय घोड़ों में से एक के नाम पर स्पाइवेयर के बजाय 'पेगासस' को चुना है। पुरुकुटसा, कुमारविष्णु, समुद्रगुप्त, पुलकेशिन द्वितीय और राजराजा चोल जैसे राजाओं से प्रेरित होकर मोदी सरकार एक मजबूत सफेद घोड़ा ढूंढ सकती है। वह अश्वमेध यज्ञ कर सकती है। सभी राज्यों में अपने योद्धा-भक्तों के साथ घोड़े को भेज सकती है। सेना की कमान भी हाथ में रहेगी। भारत के पूरे क्षेत्र में सत्तारूढ़ दल अपना वर्चस्व स्थापित कर सकता है। ऐसे में तो सत्ताधारी दल हर पांच साल में चुनाव के मामूली झंझट से छुटकारा पाने की जुगत भिड़ाने लगेंगे। पूरे देश पर अपना शासन स्थापित करने का प्रयास करेंगे। जासूसी को देशभक्ति के कर्तव्य तक बढ़ाया जा सकता है। जब तक सरकार में जासूसी को सही ठहराने वाले पर्याप्त लोग हैं, निजता के अधिकार को धिक्कार है।
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पूर्व गृह मंत्री कहते हैं, ऐसे में भारत को एक डायस्टोपियन बनने से कौन रोक सकता है। फ्रांस के राष्ट्रपति मैक्रों ने इस्राइल के पीएम बैनेट को फोन किया। फ्रांस में फोन हैक करने के लिए पेगासस स्पाईवेयर के कथित इस्तेमाल के बारे में पूरी जानकारी की मांग की है। इसमें राष्ट्रपति का फोन भी शामिल है। पीएम बैनेट ने अपनी जांच के 'निष्कर्ष' के साथ वापस आने का वादा किया है। एकमात्र सरकार, जिसे कोई फिक्र नहीं है, वह भारत सरकार है। क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि सरकार जासूसी के बारे में पूरी तरह से अवगत थी। उसे इस्राइल या एनएसओ समूह से किसी और जानकारी की आवश्यकता नहीं है। इस्राइल ने फोन निगरानी के आरोपों की समीक्षा के लिए एक आयोग का गठन किया है। भारत ने इससे इनकार किया है कि कोई अनधिकृत निगरानी थी। इस मामले पर बहस करने से भी इनकार कर दिया।
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