रेलवे के एक अधिकारी ने बताया कि यह एक प्रयास था, इसलिए कोई घायल नहीं हुआ। व्यक्ति मानसिक रूप से अस्वस्थ लग रहा था। पिछले दो महीनों में ट्रेनों में आगजनी की दो घटनाएं हो चुकी हैं। पहली घटना में 2 अप्रैल को कोझीकोड जिले में एक ट्रेन आगजनी हुई थी, जिसमें एक बच्चे सहित तीन लोगों की मौत हो गई थी और नौ अन्य झुलस गए थे। उस दिन आरोपी शाहरुख सैफी ने अलप्पुझा-कन्नूर एक्जीक्यूटिव एक्सप्रेस ट्रेन में अपने सह-यात्रियों को उस आग लगा दी थी, जब ट्रेन कोझीकोड में इलाथुर के पास कोरापुझा पुल पर पहुंची थी।
इसके बाद एक जून को पश्चिम बंगाल के एक निवासी ने कन्नूर रेलवे स्टेशन पर रुकने के बाद उसी एक्सप्रेस ट्रेन के एक डिब्बे में कथित तौर पर आग लगा दी थी और सभी यात्री उतर गए थे। व्यक्ति को अगले ही दिन गिरफ्तार कर लिया गया था और पुलिस ने बताया था कि वह एक भिखारी था जो मानसिक आघात से पीड़ित था। दूसरी घटना के बाद विपक्षी कांग्रेस और भाजपा दोनों ने सत्तारूढ़ वाम सरकार की आलोचना करते हुए कहा था कि इस तरह की घटनाओं ने राज्य के लोगों के मन में 'असुरक्षा' पैदा कर दी है।