सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2020 के बीच सीवीओ को सीवीसी के माध्यम से मिलीं 569 शिकायतें और सीधे प्राप्त 11,693 शिकायतें तीन महीने की निर्धारित अवधि से अधिक समय से लंबित हैं।
एक संसदीय समिति ने केंद्रीय सतर्कता आयोग से यह स्पष्ट करने को कहा है कि तीन साल से अधिक समय से 12,000 से अधिक शिकायतों का निपटान क्यों लंबित है। संसद को सौंपी गई अपनी हालिया रिपोर्ट में पैनल ने प्रमुख योजनाओं के लिए निर्धारित धन को इस्तेमाल नहीं किए जाने पर प्रकाश डाला और सीवीसी को निगरानी को मजबूत करने के लिए अपने संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा खर्च करने के लिए कहा। समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि गंभीर आरोपों से जुड़े 72 मामले तीन महीने की निर्धारित समयसीमा से परे केस चलाए जाने की मंजूरी के लिए लंबित हैं।
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समय सीमा के भीतर अभियोजन को नहीं दी गई मंजूरी
समिति इस बात को लेकर काफी चिंतित है कि निर्धारित समयसीमा के भीतर अभियोजन की मंजूरी नहीं देना एक नियमित मामला बन गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि पैनल ने सिफारिश की कि सरकार प्रासंगिक प्रावधानों में संशोधन करे और सीवीसी को उन मामलों में जरूरी कार्रवाई करने का अधिकार दे, जहां सक्षम अधिकारी बिना वैध कारणों के निर्धारित समयसीमा के भीतर अभियोजन की मंजूरी देने में विफल रहता है। कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग से संबंधित अनुदान मांगों (2022-23) पर विभाग से संबंधित कार्मिक, लोक शिकायत, कानून और न्याय पर संसदीय स्थायी समिति ने कहा कि मुख्य सतर्कता अधिकारियों (सीवीओ) के पास बड़ी संख्या में शिकायतें लंबित हैं।
कुछ शिकायतें तीन साल से अधिक समय से लंबित
सीवीसी की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से दिसंबर 2020 के बीच सीवीओ को सीवीसी के माध्यम से मिलीं 569 शिकायतें और सीधे प्राप्त 11,693 शिकायतें तीन महीने की निर्धारित अवधि से अधिक समय से लंबित हैं। इसमें कहा गया है कि कुछ शिकायतें तीन साल से अधिक समय से लंबित हैं। भाजपा के राज्यसभा सांसद सुशील कुमार मोदी की अध्यक्षता वाली समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति चाहती है कि सीवीसी उसे बताए कि सीवीओ के पास इतनी बड़ी संख्या में शिकायतें क्यों लंबित हैं और निर्धारित समयसीमा का पालन क्यों नहीं किया जा रहा है।
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विज्ञापन और प्रचार के लिए निर्धारित धन का उपयोग नहीं हुआ
गुरुवार को संसद में रखी गई रिपोर्ट में कहा गया कि पैनल ने जिक्र किया है कि सीवीसी ने 2021-22 के दौरान विज्ञापन और प्रचार के लिए निर्धारित धन का उपयोग नहीं किया है। नतीजतन, बजट अनुमान 2021-22 में विज्ञापन और प्रचार के लिए स्वीकृत 50 लाख रुपये की राशि को संशोधित अनुमान स्तर पर एक लाख रुपये तक कम कर दिया गया है। पैनल ने यह भी कहा कि अखंडता सूचकांक परियोजना के लिए स्वीकृत 10 लाख रुपये बिना उपयोग के पड़े हैं क्योंकि परियोजना को लागू नहीं किया जा सका।