केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा लोकसभा में पेश किए गए तीन प्रमुख आपराधिक कानून विधेयकों पर चर्चा करने के लिए तैयार गृह मामलों की स्थायी संसदीय समिति के कुछ सदस्यों ने प्रस्तावित कानूनों पर चर्चा हेतु बैठकों में भाग लेने के लिए "शॉर्ट नोटिस' दिए जाने का विरोध किया है। सूत्रों के मुताबिक, तीन सदस्यों टीएमसी के डेरेक ओ'ब्रायन और काकोली घोष दस्तीदार और कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह ने समिति के अध्यक्ष बृजलाल को पत्र लिखकर 24, 25 और 26 अगस्त को बैठकों के कार्यक्रम पर सवाल उठाया है और तारीखों को संशोधित करने की मांग की है।
समिति भारतीय न्याय संहिता विधेयक- 2023, भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता विधेयक- 2023 और भारतीय साक्ष्य विधेयक- 2023 पर चर्चा करने वाली है। इन तीनों विधेयकों में भारतीय दंड संहिता- 1860, आपराधिक प्रक्रिया संहिता-1898 और भारतीय साक्ष्य अधिनियम-1872 में बदलाव कर भारतीय आपराधिक न्याय प्रणाली को बदलने का प्रयास किया गया है।
तय कार्यक्रम के अनुसार, समिति को 'जेल-स्थिति अवसंरचना और सुधार' पर एक मसौदा रिपोर्ट (Draft Report) को अपनाने के लिए 24 अगस्त को बैठक करनी थी। इस विषय जिस पर समिति लंबे समय से विचार-विमर्श कर रही थी। इससे पहले जेल सुधार मुद्दे पर चर्चा के लिए हुई बैठक के दौरान विपक्षी सदस्यों ने मणिपुर मुद्दे पर चर्चा करने में समिति की विफलता का हवाला देते हुए विरोध करते हुए बहिर्गमन किया था। इसके बाद 18 अगस्त की रात सदस्यों को ताजा नोटिस जारी किया गया, जिसमें बताया गया कि 24, 25 और 26 अगस्त को गृह सचिव अजय कुमार भल्ला तीनों विधेयकों के विभिन्न पहलुओं पर सदस्यों को जानकारी देंगे।
टीएमसी नेता ओ'ब्रायन ने अपने पत्र में कहा कि संसद के मानसून सत्र के समापन के बाद राज्यसभा और लोकसभा दोनों के सदस्यों की अपने निर्वाचन क्षेत्रों में प्रतिबद्धताएं हैं। इतने बड़े प्रभाव वाले विधेयक पर चर्चा के लिए यह बहुत शॉर्ट नोटिस (केवल कुछ दिन) है। कृपया तारीखों को संशोधित करें और सितंबर के महीने में इसे निर्धारित करें, ताकि समिति के ज्यादातर सदस्य इन बैठकों के लिए उपस्थित हो सकें।
एक अन्य सदस्य ने कहा कि विधेयकों को 18 अगस्त को समिति के पास भेजा गया था और उसी दिन सदस्यों को विचार-विमर्श की तारीख के बारे में नोटिस मिला। उसी दिन, जैसे ही विधेयक समिति को भेजा गया था, हमें नोटिस मिला कि इसे विचार-विमर्श के लिए सूचीबद्ध किया गया है। सदस्य ने कहा, यह बहुत आश्चर्यजनक है, यह देखते हुए कि समिति मणिपुर में जारी हिंसा पर चर्चा करने के हमारे अनुरोधों से बच रही थी, लेकिन अब वही समिति जल्दबाजी में है।