वक्फ विधेयक पर लोकसभा स्पीकर से मिले थे जेपीसी में शामिल विपक्ष के सदस्य।
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आरोप-प्रत्यारोप का दौर
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी और कांग्रेस के सैयद नासिर हुसैन बैठक से बाहर निकल आए। उन्होंने कहा कि समिति की कार्यवाही तमाशा बन गई है। उन्होंने मांग की कि प्रस्तावित संशोधनों पर खंडवार विचार करने के लिए 27 जनवरी को होने वाली बैठक को 30 जनवरी या 31 जनवरी तक के लिए टाल दिया जाए। निशिकांत दुबे ने विपक्षी सदस्यों की आलोचना करते हुए कहा कि उनका आचरण संसदीय परंपरा के खिलाफ है और वे बहुमत की आवाज को दबाने की कोशिश कर रहे हैं।
मीरवाइज ने क्या कहा?
समिति के समक्ष पेश होने से पहले मीरवाइज ने कहा कि वह वक्फ संशोधन विधेयक का कड़ा विरोध करते हैं और धर्म के मामलों में सरकार के हस्तक्षेप नहीं करने का समर्थन करते हैं। हमें उम्मीद है कि हमारे सुझावों को सुना जाएगा और उन पर अमल किया जाएगा। ऐसा कोई कदम नहीं उठाया जाए, जो मुसलमानों को बसहज महसूस कराए। यह पहली बार है, जब लगभग निष्क्रिय हो चुके अलगाववादी समूह हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज ने पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य का विशेष दर्जा समाप्त होने के बाद कश्मीर घाटी से बाहर कदम रखा है।
भाजपा सांसद निशिकांत दुबे
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बैठक में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल: बनर्जी
कल्याण बनर्जी ने कहा कि बैठक में अघोषित आपातकाल जैसा माहौल चल रहा है। सभापति इस बैठक को आगे बढ़ा रहे हैं और वह किसी की नहीं सुन रहे हैं। हमें बताया गया था कि 24 और 25 जनवरी को बैठक होगी। अब आज की बैठक के लिए एजेंडे को खंड दर खंड चर्चा से बदल दिया गया है।
निशिकांत दुबे ने ओवैसी को घेरा
निशिकांत दुबे ने कहा कि विपक्ष के लोगों खासकर ओवैसी साहब की सोच है कि हमने जम्मू-कश्मीर का पूरा प्रतिनिधित्व नहीं सुना और मीरवाइज उमर फारूक को बुलाया। उन्हें सुनने के लिए ही जेपीसी अध्यक्ष ने बैठक स्थगित कर दी और खंडवार चर्चा की। आज विपक्ष की सोच और नजरिया उजागर हो गया है। उन्होंने मीरवाइज के सामने हंगामा किया और बदसलूकी की। यह संसदीय लोकतंत्र के खिलाफ है।
'विपक्ष बहुमत की आवाज को दबाना चाहता है'
उन्होंने कहा कि अगर आज और कल खंडवार चर्चा के लिए बैठक होती भी तो 27 जनवरी या 28 जनवरी को एक और बैठक होती। 27 जनवरी के लिए पहले से ही बैठक तय थी। विपक्ष बहुमत की आवाज को दबाना चाहता है। ज्यादातर सदस्यों ने 27 जनवरी को बैठक करने का सुझाव दिया है। 29 जनवरी को हम अध्यक्ष को रिपोर्ट सौंपेंगे। जब भी मैंने जेपीसी में बोलने के लिए माइक लिया है, विपक्ष ने हमेशा मेरी आवाज को दबाने की कोशिश की है।
शिवसेना नेता अरविंद सावंत।
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'किस तरह की जल्दी, समझ नहीं पा रहा'
निलंबन के बाद शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि जेपीसी किसी तानाशाही प्रवृत्ति से चल रही है, किस तरह की जल्दी है, यह मैं समझ नहीं पा रहा हूं। यह एक महत्वपूर्ण विधेयक है, जो देश में अराजकता पैदा कर सकता है, लेकिन इसे उस तरह से नहीं निपटा जा रहा है। कहा गया था कि खंड-दर-खंड चर्चा होगी, लेकिन आज जम्मू-कश्मीर से लोग आए और उस खंड-दर-खंड चर्चा को 27 जनवरी के लिए स्थगित कर दिया गया।
'रात 11:40 बजे हमें संदेश मिला कि एजेंडा बदल दिया गया'
मामले में डीएमके सांसद ए राजा ने कहा कि इस महीने की 18, 19 और 20 तारीख को जेपीसी दौरे पर थी। दौरे का आखिरी सत्र 21 तारीख को पूरा हुआ। बैठक के दौरान सचिवालय से सूचना मिली कि 24 तारीख को बैठक होगी। हमने तुरंत चेयरमैन के सामने विरोध किया। 21 तारीख को हम दौरे पर थे। हम उसी रात चले जाने वाले हैं। हमें 24 तारीख को कैसे बुलाया जा सकता है? क्योंकि हमें अपने निर्वाचन क्षेत्रों में वापस जाना था। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि वे विचार करेंगे। 21 जनवरी को हमें एक और नोटिस मिला, जिसमें सभी सदस्यों से 48 घंटे के भीतर अपने संशोधन देने का अनुरोध किया गया था। हम सभी ने तुरंत संशोधन रखे और वे 24 तारीख को इस पर चर्चा करना चाहते थे, लेकिन कल रात 11:40 बजे हमें संदेश मिला कि एजेंडा बदल दिया गया है।
टीएमसी पर भाजपा ने साधा निशाना
वक्फ संशोधन विधेयक 2024 पर टीएमसी सांसद और जेपीसी के सदस्य कल्याण बनर्जी को आज के लिए निलंबित किए जाने पर भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने कहा, 'यह पहली बार नहीं है कि वे (टीएमसी नेता) भ्रम पैदा करने के लिए बैठक की कार्यवाही को बाधित करने की कोशिश कर रहे हैं, उनकी पार्टी किस तरह का संदेश देना चाहती है? टीएमसी का रुख कभी तय नहीं होता। वे एक खास समुदाय को संदेश देना चाहते हैं'।
वहीं वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 पर गठित संयुक्त संसदीय समिति के अध्यक्ष जगदंबिका पाल ने बैठक को लेकर कहा कि, 'आज की बैठक संपन्न हो गई है। आज दो महत्वपूर्ण प्रतिनिधिमंडल गवाह के तौर पर आए थे। एक प्रतिनिधिमंडल मीरवाइज उमर फारूक के नेतृत्व में जम्मू-कश्मीर से था। दूसरा प्रतिनिधिमंडल लॉयर्स फॉर जस्टिस का था, जिसमें हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकील शामिल थे। उन्होंने अच्छा प्रेजेंटेशन दिया। उन्होंने विस्तृत शोध कार्य किया है, जो हमारी रिपोर्ट के लिए भी उपयोगी होगा। भले ही यह हमारे अधिकार क्षेत्र में न हो, लेकिन हमारे सदस्यों ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय से कहा कि इस पर ध्यान दिया जाना चाहिए, लेकिन मुझे दुख है कि आज की बैठक इतनी महत्वपूर्ण थी, लेकिन जिस तरह से कल्याण बनर्जी ने बैठक में बेवजह हंगामा किया, वेल में घुसकर बहस करने की कोशिश की और गाली-गलौज भी की, मुझे लगता है कि उन्होंने आज सारी हदें पार कर दीं और सारी मर्यादाएं तोड़ दीं। मुझे लगता है कि पूरा देश, पूरी दुनिया यह देख रही है...वह नहीं चाहते थे कि हम मीरवाइज उमर फारूक को भी सुनें, हमारे सभी सदस्य इससे आहत हैं। हमने बैठक दो बार स्थगित की, लेकिन उन्होंने अपना मन बना लिया था आज बैठक न होने देने के लिए... इसके बाद निशिकांत दुबे ने प्रस्ताव रखा और कुछ सदस्यों को बाहर भेजना पड़ा, जेपीसी सदस्य होने के बावजूद वे बाहर ही बयान देते हैं...ट्रिपल तलाक, अनुच्छेद 370 और अनुच्छेद 35ए के समय की तरह ही प्रयास किए जा रहे हैं। लेकिन पहले के नतीजे सकारात्मक थे और ये नतीजे भी सकारात्मक होंगे, जेपीसी की अगली बैठक 27 जनवरी को होगी'।