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BNS: 'लापरवाही से मौत के मामले में सात साल की सजा ज्यादा', संसदीय समिति ने दिये ये सुझाव

Sun, 12 Nov 2023 03:05 PM IST
नितिन गौतम न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

समिति ने कहा कि आईपीसी की धारा 304ए के मुकाबले यह सजा ज्यादा है। बता दें कि आईपीसी की धारा 304ए के तहत लापरवाही से मौत के मामले में दोषी को दो साल तक की जेल या जुर्माने की सजा का प्रावधान है। 
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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संसदीय समिति का मानना है कि नए प्रस्तावित अपराध विधेयक में लापरवाही से मौत के मामले में सात साल जेल की सजा ज्यादा है। समिति ने सुझाव दिया है कि इस सजा को घटाकर पांच साल कर देना चाहिए। बता दें कि सरकार इंडियन पीनल कोड 1860 की जगह भारतीय न्याय संहिता, क्रिमिनल प्रोसिजर एक्ट 1898 की जगह भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता और इंडियन एविडेंस एक्ट 1872 की जगह भारतीय साक्ष्य अधिनियम लाने जा रही है। फिलहाल इन विधेयकों का संसद की एक समिति विश्लेषण कर रही है। इस समिति की अध्यक्षता भाजपा सांसद बृजलाल कर रहे हैं। 
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संसदीय समिति ने दिया ये सुझाव
संसदीय समिति ने अपनी रिपोर्ट शुक्रवार को राज्यसभा में भेज दी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति को ऐसा लगता है कि क्लॉज 104(1) के तहत सात साल की सजा को कम करके पांच साल किया जा सकता है। बता दें कि भारतीय न्याय संहिता के क्लॉज 104(1) के तहत लापरवाही से मौत के मामले में दोषी को सात साल तक की जेल और जुर्माने की सजा का प्रावधान रखा गया है। समिति ने कहा कि आईपीसी की धारा 304ए के मुकाबले यह सजा ज्यादा है। बता दें कि आईपीसी की धारा 304ए के तहत लापरवाही से मौत के मामले में दोषी को दो साल तक की जेल या जुर्माने की सजा का प्रावधान है। 

बता दें कि भारतीय न्याय संहिता के क्लॉज 104(2) के तहत लापरवाही से मौत के मामले में अगर आरोपी घटनास्थल से भाग जाता है या घटना की जानकारी पुलिस या मजिस्ट्रेट को देने में नाकाम रहता है तो उसे 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। समिति का मानना है कि भारतीय न्याय संहिता का खंड 104(2) भारत के संविधान के अनुच्छेद 20(3) के खिलाफ हो सकता है जो कहता है, "अपराध के आरोपी किसी भी व्यक्ति को अपने खिलाफ गवाह बनने के लिए मजबूर नहीं किया जाएगा।"
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समिति ने यह भी सिफारिश की कि अगर सरकार को न्याय संहिता के खंड 104(2) को बरकरार रखना है, तो इसे केवल मोटर वाहन दुर्घटनाओं तक सीमित करना चाहिए।
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