संसद की एक समिति ने सिफारिश की है कि आयुष्मान वय वंदना कार्ड के लिए 70 वर्ष और उससे अधिक की आयु मानदंड को बदलकर 60 वर्ष किया जाना चाहिए, ताकि आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा योजना का दायरा बढ़ाया जा सके। चाहे लोगों की सामाजिक-आर्थिक स्थिति कैसी भी हो।
स्वास्थ्य और परिवार कल्याण पर विभाग-संबंधित संसदीय स्थायी समिति ने बुधवार को राज्यसभा में प्रस्तुत अपनी 163वीं रिपोर्ट में मौजूदा स्वास्थ्य देखभाल दायरे को प्रति परिवार प्रति वर्ष पांच लाख रुपये से संशोधित कर प्रति परिवार प्रति वर्ष 10 लाख रुपये करने की भी सिफारिश की।
समिति ने रिपोर्ट में ये भी बताया
संसदीय समिति ने यह भी बताया कि कई उच्च स्तरीय चिकित्सा प्रक्रियाएं और परीक्षण भी आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई) में शामिल नहीं हैं।
इस प्रकार समिति ने सिफारिश की कि योजना के अंतर्गत कवर किए गए पैकेज/प्रक्रियाओं की संख्या की समीक्षा की जानी चाहिए और उपचार की उच्च लागत वाली गंभीर बीमारियों के उपचार से संबंधित नए पैकेज/प्रक्रियाओं को शामिल किया जाना चाहिए।
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एबी-पीएमजेएवाई का विस्तार करने के लिए सरकार की सराहना
समिति ने इस बात की सराहना की कि सरकार ने हाल ही में एबी-पीएमजेएवाई का विस्तार किया है, जिसके तहत वय वंदना योजना के अंतर्गत 4.5 करोड़ परिवारों के 70 वर्ष और उससे अधिक आयु के छह करोड़ वरिष्ठ नागरिकों को शामिल किया गया है, चाहे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति कुछ भी हो।
वरिष्ठ नागरिकों के इलाज के लिए है योजना
आयुष्मान वय वंदना कार्ड धारक 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों के इलाज के लिए 1,443 करोड़ रुपये की राशि निर्धारित की गई है। समिति का मानना है कि इस कार्ड के लिए आयु मानदंड को 60 वर्ष करना चाहिए ताकि अधिक लोगों को इसका लाभ मिल सके।
बजट के कम उपयोग की तरफ किया इशारा
हालांकि, समिति ने पिछले वर्ष और वर्तमान वित्त वर्ष में बजट के कम उपयोग की ओर भी इशारा किया। इसमें कहा गया कि यह योजना भारत की कमजोर आबादी को स्वास्थ्य सुरक्षा और सेवाएं प्रदान करने के लिए महत्वपूर्ण है, लेकिन कई क्षेत्रों में सुधार की जरूरत है।
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योजना का बजट घटाकर 6800 करोड़ रुपये किया गया
समिति ने पाया कि वित्त वर्ष 2023-24 में 7,200 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया गया था, जो बाद में घटाकर 6,800 करोड़ रुपये कर दिया गया। इसी तरह, अगले वित्त वर्ष के लिए बजट में भी कमी आई है। हालांकि, समिति ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से निधि जारी करने की प्रक्रिया की गहन समीक्षा करने की सिफारिश की ताकि कम उपयोग के कारणों की पहचान की जा सके।
समिति का सुझाव- राज्यों के प्रदर्शन को निधी जारी करने से जोड़ा जाए
इसके साथ ही, समिति ने सुझाव दिया कि राज्यों के प्रदर्शन को निधि जारी करने से जोड़ा जाए ताकि सहायता उन क्षेत्रों में मिले जहां इसकी सबसे अधिक आवश्यकता है। समिति ने इस बात पर जोर दिया कि योजना की सफल कार्यान्वयन के लिए सार्वजनिक जागरूकता बढ़ाना और संबंधित राज्य सरकारों के साथ उच्च-स्तरीय जुड़ाव जरूरी है।
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