विपक्ष की इस मुहिम से बीजेडी, बीआरएस, वाईएसआरसीपी जैसे दलों के किनारा करने और बसपा की भी इस मुहिम से दूरी बनाने से सरकार के हौसले बुलंद हैं। सरकार का मानना है कि संसद की सुरक्षा चूक मामले में सरकार के खिलाफ यह मुहिम विपक्ष की नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की है।
शीतकालीन सत्र में बचे चार कार्य दिवस में सरकार की प्राथमिकता अहम विधायी कामकाज निपटाने की है। बड़ी संख्या में विपक्षी सदस्यों के निलंबन के सियासी असर से बेपरवाह सरकार की कोशिश कम से कम आठ अहम विधेयकों को कानूनी जामा पहनाने की है।
दरअसल, विपक्ष की इस मुहिम से बीजेडी, बीआरएस, वाईएसआरसीपी जैसे दलों के किनारा करने और बसपा की भी इस मुहिम से दूरी बनाने से सरकार के हौसले बुलंद हैं। सरकार का मानना है कि संसद की सुरक्षा चूक मामले में सरकार के खिलाफ यह मुहिम विपक्ष की नहीं, बल्कि इंडिया गठबंधन के सहयोगी दलों की है। इन गठबंधन के सहयोगियों के इतर दूसरे विपक्षी दलों का रुख अलग है। ये दल परंपरा के मुताबिक विधायी कामकाज के साथ दूसरी कार्यवाही को जारी रखने के पक्ष में हैं। यही कारण है कि इन दलों के एक भी सांसद ने सुरक्षा चूक को ले कर सरकार के रवैये पर सवाल नहीं उठाया है।
इन कानूनों को पारित कराना लक्ष्य
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लंबित विधायी कामकाज में भारतीय न्याय संहिता, भारतीय नागरिक सुरक्षा, भारतीय साक्ष्य विधेयक को कानूनी जामा पहनाना है, जिसका जमीनी स्तर पर सरकार के पक्ष में व्यापक असर पड़ेगा। इसके अलावा, दिल्ली को सीलिंग से राहत देने, चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति जैसे अहम विधायी कार्य भी लंबित हैं।