जटिल कानूनी मुद्दों पर सरकार को सलाह देने वाले लॉ कमीशन के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया की कछुआ चाल पर एक संसदीय समिति ने निराशा जताई है। समिति ने कहा कि समझना कठिन है कि इतनी महत्वपूर्ण संस्था में नियुक्तियों में इतनी देरी क्यों की जा रही है, जबकि इसका तीन साल का कार्यकाल समाप्त ही होने वाला है।
भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि सार्थक कार्यकाल और कामकाज के लिए लॉ कमीशन के गठन की तिथि से शेष अवधि के बजाय अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पूरे कार्यकाल तीन साल के लिए की जानी चाहिए। समिति ने संस्तुति की कि कानून मंत्रालय के कानून मामले विभाग को समिति के सुझावों पर अपने विचार प्रस्तुत करने चाहिए।
कानून और कार्मिक संसदीय समिति ने कानून मामले विभाग की अनुदान मांगों (2022-23) पर रिपोर्ट में पाया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22वां लॉ कमीशन बनाने को मंजूरी दी है। इसके लिए 21 फरवरी, 2020 में गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था। इसके दो साल बाद भी कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।