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लोकसभा: संसदीय समिति ने पूछा सवाल, मानकों को बावजूद सीवर-सेप्टिक टैंक साफ करते हुए क्यों हो रही लोगों की मौत

Thu, 24 Mar 2022 09:08 PM IST
गौरव पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करते समय 325 लोगों की मौत हुई है। 
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संसद - फोटो : पीटीआई (फाइल)
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विस्तार
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संसद की एक स्थायी समिति ने जानना चाहा है कि आवश्यक मानकों के बावजूद सीवर व सेप्टिक टैंक साफ करते समय लोगों की मौत क्यों हो रही है। इसके साथ ही समिति ने बिना किसी देरी के उनके पुनर्वास के लिए नीतियों में खामियों को दूर करने पर जोर दिया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले पांच साल में सीवर और सेप्टिक टैंकों की सफाई करते समय 325 लोगों की मौत हुई है। 

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गुरुवार को लोकसभा में एक स्थायी संसदीय समिति की रिपोर्ट पेश की गई। इसमें कहा गया है कि समिति उन कारणों को समझने में असमर्थ है कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग की पहल अपेक्षित प्रभाव क्यों नहीं डाल रही है। हाथ से मैला ढोने पर रोक लगाने के लिए विभाग की ओर से कौशल विकास कार्यक्रम और रियायती दरों पर ऋण देने जैसी कई योजनाएं लागू की गई हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि समिति यह जानकर आश्चर्यचकित है कि इन सभी मानकों के बावजूद लोगों की आज भी सीवर और सेप्टिक टैंक साफ करते वक्त मौत हो रही है। समिति ने कहा कि हम चाहते हैं कि सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग योजना की समय-समय पर जांच के लिए एक तंत्र बनाए। बिना देरी के इसके प्रयासों को प्रभावित करने वाली खामियों को दूर करने की सख्त जरूरत है।

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लॉ कमीशन: अध्यक्ष-सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने पर संसदीय समिति निराश

जटिल कानूनी मुद्दों पर सरकार को सलाह देने वाले लॉ कमीशन के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया की कछुआ चाल पर एक संसदीय समिति ने निराशा जताई है। समिति ने कहा कि समझना कठिन है कि इतनी महत्वपूर्ण संस्था में नियुक्तियों में इतनी देरी क्यों की जा रही है, जबकि इसका तीन साल का कार्यकाल समाप्त ही होने वाला है।

भाजपा के राज्यसभा सदस्य सुशील मोदी की अध्यक्षता वाली समिति ने कहा कि सार्थक कार्यकाल और कामकाज के लिए लॉ कमीशन के गठन की तिथि से शेष अवधि के बजाय अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति पूरे कार्यकाल तीन साल के लिए की जानी चाहिए। समिति ने संस्तुति की कि कानून मंत्रालय के कानून मामले विभाग को समिति के सुझावों पर अपने विचार प्रस्तुत करने चाहिए।

कानून और कार्मिक संसदीय समिति ने कानून मामले विभाग की अनुदान मांगों (2022-23) पर रिपोर्ट में पाया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 22वां लॉ कमीशन बनाने को मंजूरी दी है। इसके लिए 21 फरवरी, 2020 में गजट नोटिफिकेशन भी जारी किया गया था। इसके दो साल बाद भी कमेटी के अध्यक्ष और सदस्यों की नियुक्ति प्रक्रिया पूरी नहीं की गई है।
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कई राज्यों में किसानों की आय घटी
सरकार एक तरफ किसानों की आमदनी दोगुनी करने के प्रयास करने की बात कह रही है, वहीं कई राज्यों में वर्ष 2015-16 से 2018-19 के बीच किसानों की आमदनी घटने पर संसदीय समिति ने चिंता जताते हुए कृषि मंत्रालय को विशेष टीम गठित कर कारण तलाशने और जरूरी कदम उठाने को कहा है।

स्थायी समिति ने संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कहा कि कुछ राज्यों के अलावा सरकार किसानों की आय दोगुनी करने से काफी पीछे है। झारखंड, मध्य प्रदेश, नगालैंड और ओडिशा में वर्ष 2015-16 से 2018-19 के बीच किसानों की मासिक आमदनी क्रमश: 7068 से 4895, 9740 से 8339, 11428 से 9877 और 5271 से 5112 हो गई। 

यह हाल तब है कि जब पिछले तीन वर्षों में कृषि विभाग 67,929.1 करोड़ खर्च ही नहीं कर पाया।  यह तब है जब एनएसओ के स्थिति आकलन सर्वे के अनुसार देश में किसान परिवारों की मासिक आमदनी 8059 से बढ़कर 10,218 रुपये होना अच्छा संकेत है, लेकिन कई राज्यों में किसानों की आय कम हो गई और कृषि विभाग मूकदर्शक बना हुआ है।
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