भाजपा सांसद दुबे ने लोकसभा में किस्सा बताते हुए कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेता महिलाओं के बारे में क्या सोचते हैं, ये आज जानना बहुत जरूरी है। उन्होंने एक दिवंगत नेता के परकटी के बयान का मुद्दा उठाया। साथ ही उन्होंने 2011 में लोकसभा में घटी एक घटना का भी जिक्र किया। दुबे ने कहा कि 2010 में महिला आरक्षण बिल राज्यसभा में पास हुआ, लोकसभा में 2011 में आया। वी. नारायण स्वामी बिल पेश कर रहे थे। तभी समाजवादी पार्टी के सांसद यशवीर सिंह गए और बिल खींच लिया। इसी वेल में उनका कोई कॉलर पकड़ने आया तो वो मैडम सोनिया गांधी थीं। मैंने कहा कि आप महारानी नहीं है आप मारपीट नहीं कर सकती। कांग्रेस सांसद विलास मुत्तेवार ने उनको पीटा। उस वक्त मुलायम सिंह यादव सदन में नहीं थे। मुलायम सिंह यादव ने इस घटना के बाद कहा कि यदि बीजेपी नहीं होती तो आज के दिन में हमारे सांसद नहीं बचते। आज इन सभी पार्टियों ने मिलकर घमंडिया गठबंधन बनाया है।
सोनिया कैसे भूल गई गीता मुखर्जी और सुषमा स्वराज को
दुबे ने सोनिया गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि जब सोनिया जी ने विपक्ष की ओर से भाषण शुरू किया तो मुझे लगा कि वो राजनीति से ऊपर उठकर बोलेंगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। संसद में महिला आरक्षण के मुद्दे पर सबसे ज्यादा आवाज उठाने वाली बंगाल की गीता मुखर्जी और बीजेपी की सुषमा स्वराज थीं। सोनिया गांधी ने अपने भाषण में किसी का जिक्र नहीं किया। वो खुद इसका श्रेय लेना चाहती हैं, वो इस मुद्दे पर राजनीति करने की कोशिश कर रही हैं।
दुबे ने आगे कहा कि विपक्षी एकता के दबाव में ये गठबंधन कानून के खिलाफ बात कर रहा है। जो गोल मारता है, उसी के नाम से गोल माना जाता है। पीएम नरेंद्र मोदी गोल मारने को तैयार है, ये बीजेपी का बिल है। वहीं विपक्ष ओबीसी आरक्षण, राज्यसभा में आरक्षण, कोटा, विधान परिषद में आरक्षण और बिल 2024 में क्यों लागू नहीं हो रहा ये सब बातें करके गुमराह करने की कोशिश कर रहा है।