केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने लोकसभा में बताया कि भारत में कोरोना अभी सामुदायिक स्तर पर नहीं पहुंचा है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार इससे निपटने के प्रयास कर रही है। दवाओं के लिए हो रहे शोधों पर नजर रखी जा रही है। आईसीएमआर की टीम विश्व के वैज्ञानिकों के साथ मिलकर दवा पर काम कर रही है। सरकार डब्ल्यूएचओ से लगातार सुझाव ले रही है और सुरक्षात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा, कोरोना जांच के लिए एक तय प्रोटोकॉल है। लोगों को बेवजह घबराने और दहशत में आने की जरूरत नहीं है।
सोमवार को दो बजे बैठेगी संसद
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने शुक्रवार को कहा कि सोमवार को संसद दोपहर दो बजे से बैठेगी। दरअसल शनिवार रविवार को सभी सांसद अपने अपने संसदीय क्षेत्र में रहते हैं। कोरोना वायरस को लेकर घरेलू उड़ानों के समय में फेरबदल हुआ है। ऐसे में सांसदों की दलील थी कि उनके लिए सोमवार को सुबह संसद समय पर पहुंचना मुश्किल है। जिसके मद्देनजर स्पीकर ने सभी सदस्यों से चर्चा के बाद यह तय किया कि 23 मार्च को सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे से शुरू होगी। उधर राज्यसभा में सभापति वेंकैया नायडू ने भी ऐसी ही घोषणा की है। हालांकि अभी यह तय नहीं है कि यह व्यवस्था अगले सोमवार 30 मार्च को होगी या नहीं।
राज्यसभा में कांग्रेस सांसद आनंद शर्मा ने सवाल उठाया कि क्या संसद उसके द्वारा पारित कानून से भी ऊपर है। जब देश में महामारी अधिनियम लागू है, जगह जगह धारा 144 है तो सदन क्यों चल रही है। 65 वर्ष से अधिक आयु वालों को घर के भीतर रहने को कहा गया है। उन्होंने कहा, यहां भी तो 65 वर्ष से ऊपर के कई सांसद हैं। मेरी और सभापति की उम्र खुद 65 से अधिक है। क्या हमारे लिए सुरक्षित रहना जरूरी नहीं। टीएमसी और शिवसेना सांसदों ने भी आनंद शर्मा का समर्थन किया।
इस पर रेल मंत्री पीयूष गोयल ने कहा, इस अधिनियम में जरूरी सेवाओं को परे रखा गया है। संसद का चालू सत्र सांसदों द्वारा देश के प्रति अपनी जिम्मेदारियों के निर्वहन का उदाहरण हैं। हम वैसे ही राष्ट्र की सेवा कर रहे हैं जैसे 65 से अधिक आयु के डॉक्टर देश की सेवा में लगे हैं। राज्यसभा में सदस्यों ने कोरोना से निपटने के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन किया। उच्च सदन में पीएम मोदी पर भरोसे का प्रस्ताव भी पास किया गया। इस दौरान सदस्यों ने सत्र समाप्त करने की घोषणा की।
टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर एकांतवास में गए
राज्यसभा में टीएमसी सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने खुद को एकांतवास में रख लिया है। उन्होंने सभापति को पत्र लिखकर इसकी सूचना। एकांतवास में जाने वाले तीसरे सांसद हैं। उनसे पहले पूर्व केंद्रीय मंत्री सुरेश प्रभु और विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन भी एकांतवास में जा चुके हैं।
आरएसपी सांसद एनके प्रेमचंद्रन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार को वित्त विधेयक पर चर्चा एवं उसे पारित कराने के लिए लोकसभा में लाने की तिथि बतानी चाहिए। प्रेमचंद्रन ने कहा कि सदन में सभी अनुदानों की पूरक मांगें पारित हो चुकी हैं, लेकिन वित्त विधेयक को अब तक नहीं लाया गया है।
उन्होंने कहा कि यह देश के लिए महत्वपूर्ण विधेयक है और यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि इसे टाला जा रहा है। प्रेमचंद्रन ने कहा, 'कृपया तारीख बताइए। हम इस विधेयक को पारित करने के लिए तारीख की पुष्टि करने की मांग कर रहे हैं।' तृणमूल कांग्रेस के सौगत रॉय ने भी इस मुद्दे पर प्रेमचंद्रन का समर्थन किया।
कोरोना की औषधियों के बारे में फैलाई जा रही सूचनाएं सत्यापित नहीं: आयुष मंत्री
आयुष मंत्री श्रीपद नाईक ने शुक्रवार को लोकसभा में कहा कि कोरोना वायरस से निपटने को लेकर विभिन्न औषधियों के कारगर होने की जो सूचनाएं प्रसारित की जा रही हैं वो सत्यापित नहीं हैं तथा इससे मंत्रालय का कोई लेनादेना नहीं है।
सदन में तेजस्वी सूर्या, उत्तम कुमार रेड्डी और शताब्दी रॉय के पूरक प्रश्नों के उत्तर में नाईक ने यह भी कहा कि आयुष मंत्रालय की ओर से जो परामर्श जारी किया गया था उसमें किसी दवा से कोरोना के उपचार का दावा नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि परामर्श में सिर्फ श्वसन तंत्र को मजबूत बनाने के उपाय सुझाए गए थे।
राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय सत्र की शेष बैठकों में भाग नहीं लेंगे
तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सुखेंदु शेखर रॉय ने कोरोना वायरस के प्रकोप को देखते हुए खुद ही पृथक रहने का फैसला किया है और इस वजह से वह उच्च सदन की शेष बैठकों में भाग नहीं लेंगे। शुक्रवार को उच्च सदन की बैठक शुरू होने पर राज्यसभा के सभापति एम वेंकैया नायडू ने कहा कि उन्हें सुखेंदु शेखर रॉय का एक पत्र मिला है जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस को देखते हुए पृथक (अलग-थलग) रहने का फैसला किया है।
नायडू ने कहा कि इस वजह से रॉय ने सत्र की शेष बैठकों से अनुपस्थित रहने के लिए सदन से अनुमति मांगी है। इसके बाद सदन ने रॉय को शेष बैठकों से अनुपस्थित रहने के लिए अनुमति प्रदान कर दी।
राज्यसभा में प्रधानमंत्री के संदेश के साथ दिखाई गई एकजुटता, पारित किया गया प्रस्ताव
कोरोना वायरस के प्रसार को रोकने के लिए सरकार के प्रयासों का समर्थन करते हुए शुक्रवार को राज्यसभा में एक प्रस्ताव पारित कर इस बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा घोषित उपायों के साथ एकजुटता दिखाई गई और इस संकट पर विजय पाने का संकल्प व्यक्त किया गया। सरकार ने उच्च सदन में यह स्पष्ट किया कि संसद सदस्य ऐसे समय में अपने दायित्वों का पालन कर देश को 'नेतृत्व' का परिचय दे रहे हैं क्योंकि बजट पारित करना भी एक अनिवार्यता है।
उपसभापति हरिवंश ने यह प्रस्ताव पढ़ते हुए कहा, 'आज दुनिया कोरोना वायरस के संकट से जूझ रही है। भारत ने सभी जरूरी उपाय किए हैं। कल प्रधानमंत्री ने जनता के साथ संवाद किया। भयभीत होने की कोई वजह नहीं, बल्कि सावधानी बरतने की अपील कर उन्होंने जनता का विश्वास बढ़ाया। कोरोना संकट से बचने के अनेक उपाय और कार्यक्रम उन्होंने बताये। रविवार 22 मार्च को जनता कर्फ्यू का पालन करने की उन्होंने अपील की।'