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Parliament House: राज्यसभा सचिवालय का निर्देश, संसद भवन का इस्तेमाल धरना- प्रदर्शन  के लिए नहीं किया जा सकता

Sat, 16 Jul 2022 02:49 AM IST
Amit Mandal एजेंसी, नई दिल्ली।

सार

संसद के 18 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र से पहले राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी द्वारा जारी बुलेटिन में इस मसले पर सांसदों से सहयोग की अपील की गई है।
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राज्यसभा - फोटो : संसद टीवी
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विस्तार
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लोकसभा और राज्यसभा में उपयोग होने वाले असंसदीय शब्दों की सूची पर उठा विवाद शांत भी नहीं हुआ था कि राज्यसभा सचिवालय के एक और निर्देश से नया विवाद खड़ा हो गया है। राज्यसभा सचिवालय ने शुक्रवार को अपने एक निर्देश में कहा कि संसद भवन परिसर का इस्तेमाल धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, अनशन या धार्मिक समारोहों के लिए नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस और कुछ अन्य विपक्षी दलों ने इसे सरकार का तुगलकी फरमान करार दिया है। वहीं, अधिकारियों ने कहा कि सत्र के पहले इस तरह के बुलेटिन जारी किया जाना ‘नियमित’ प्रक्रिया का हिस्सा है।

संसद के 18 जुलाई से शुरू हो रहे सत्र से पहले राज्यसभा के महासचिव पीसी मोदी द्वारा जारी बुलेटिन में इस मसले पर सांसदों से सहयोग की अपील की गई है। इसमें कहा गया है कि सदस्य संसद भवन परिसर का इस्तेमाल धरना, प्रदर्शन, हड़ताल, अनशन या धार्मिक समारोहों के लिए नहीं कर सकते हैं। विपक्ष के नेता पिछले कुछ समय में संसद परिसर के अंदर धरना, प्रदर्शन कर चुके हैं। साथ ही वे परिसर के अंदर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास विरोध और अनशन भी कर चुके हैं। विपक्षी दलों की आपत्ति पर राज्यसभा सचिवालय ने कहा है कि इस तरह का बुलेटिन या परिपत्र संसद के प्रत्येक सत्र से पहले आम तौर पर जारी किया जाता है। सचिवालय ने वर्ष 2013 में कांग्रेस नीत संप्रग सरकार के समय जारी ऐसे ही परिपत्र की प्रति साझा करते हुए कहा कि ऐसे परिपत्र कई वर्षों से जारी किए जा रहे हैं।
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सांसदों को किसी भी धर्म का अनादर नहीं करना चाहिए
देश में धार्मिक टिप्पणियों के चलते पिछले कुछ समय से चल रहे विवाद के बीच राज्यसभा सचिवालय ने सांसदों को इससे बचने की नसीहत भी दी है। सचिवालय ने सांसदों को फिर से नैतिक आचार संहिता की याद दिलाई है। सांसदों को किसी भी धर्म और काम का अनादर नहीं करने और इसके बारे में टिप्पणी करने से बचने को कहा गया है। आचार संहिता में कहा गया है कि सदस्यों को अपने ऊपर जनता के भरोसे को बनाए रखने के लिए अपनी जिम्मेदारी स्वीकार करनी चाहिए और लोगों की भलाई के लिए अपने जनादेश का निर्वहन करने के लिए पूरी लगन से काम करना चाहिए। 

ऐसा कुछ न करें जिससे संसद की छवि खराब हो
सदस्यों से कहा गया है कि वे ऐसा कुछ भी न करें जिससे संसद की छवि खराब हो और उनकी विश्वसनीयता प्रभावित हो। लोगों के सामान्य कल्याण को आगे बढ़ाने के लिए उन्हें संसद सदस्य के रूप में अपनी स्थिति का उपयोग करना चाहिए। उन्हें हमेशा यह देखना चाहिए कि उनके निजी वित्तीय हित और उनके परिवार के सदस्यों के हित सार्वजनिक हित के विरोध में नहीं आते हों।

पैसे लेकर प्रश्न पूछने या प्रस्ताव पेश करने से बचें
इसमें यह भी कहा गया है कि सदस्यों को पैसे लेकर किसी बिल या प्रस्ताव पेश नहीं करना चाहिए। उन्हें ऐसे उपहार नहीं लेने चाहिए जो उनके आधिकारिक कर्तव्यों के ईमानदार और निष्पक्ष निर्वहन में बाधा उत्पन्न कर सकता है।

गोपनीयता भंग करने से बचें
यदि सदस्यों के पास उनके संसद सदस्य या संसदीय समितियों के सदस्य होने के कारण गोपनीय जानकारी है, तो उन्हें अपने व्यक्तिगत हितों को आगे बढ़ाने के लिए ऐसी जानकारी का खुलासा नहीं करना चाहिए। सदस्यों को उन व्यक्तियों और संस्थानों को प्रमाण पत्र देने से बचना चाहिए जिनका कोई व्यक्तिगत हित नहीं है। 

इस वजह से जारी की गई आचार संहित 
हाल के कुछ सत्रों में राज्यसभा ने कई सदस्यों को आक्रामक व्यवहार करते देखा है, जिसमें कई मौकों पर जब सदस्यों को अस्वीकार्य तरीके से सुरक्षा कर्मचारियों के साथ व्यवहार करने के लिए निलंबित कर दिया गया है। दरअसल, बजट सत्र के पहले चरण के दौरान संसद के सुरक्षाकर्मियों को शारीरिक नुकसान पहुंचाने और कुर्सी को डराने-धमकाने के आरोप में विपक्ष के 12 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया था। 

विपक्ष ने पूछा, आजादी के 75वें  वर्ष में यह क्या हो रहा है?
कांग्रेस महासचिव एवं राज्यसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक जयराम रमेश ने सरकार पर निशाना साधते हुए ट्वीट किया कि विषगुरु का ताजा प्रहार...धरना मना है। उन्होंने इसके साथ 14 जुलाई का बुलेटिन भी साझा किया। राजद प्रवक्ता और राज्यसभा सांसद मनोज झा ने आरोप लगाया कि असंसदीय शब्दों की नई सूची के जरिये संसदीय विमर्श पर बुलडोजर चलाने के बाद अब नया तुगलकी फरमान आया कि आप संसद परिसर में धरना, प्रदर्शन या अनशन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि देश की आजादी के 75वें वर्ष में यह हो क्या रहा है? पड़ोस के श्रीलंका से सीखिए हुजूर...जय हिंद। शिवसेना सांसद प्रियंका चतुर्वेदी ने राज्यसभा सचिवालय बुलेटिन को लेकर ट्वीट किया, क्या अब वे संसद में पूछे जाने वाले प्रश्नों को लेकर भी ऐसा करेंगे? आशा करती हूं कि यह पूछना असंसदीय प्रश्न नहीं है। माकपा नेता सीताराम येचुरी ने सरकार की आलोचना की और कहा कि यह लोकतंत्र की आवाज दबाने का प्रयास है। उन्होंने कहा कि जितनी निकम्मी सरकार, उतनी ही डरपोक। इस तरह के तानाशाही आदेश निकाल कर लोकतंत्र का मखौल उड़ाया जा रहा है। संसद भवन परिसर में धरना देना सांसदों का राजनीतिक अधिकार है, जिसका हनन हो रहा है।
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बिना तथ्य के आरोप प्रत्यारोप से बचें : बिरला
नए निर्देश पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि लोकसभा से कोई नया बुलेटिन जारी नहीं किया गया, लेकिन ऐसे बुलेटिन जारी करना एक नियमित प्रक्रिया है। यह प्रक्रिया लंबे समय से जारी है। ऐसा बुलेटिन 2009 में भी जारी किया गया था। उन्होंने कहा कि हमारा सभी राजनीतिक दलों से आग्रह है कि वे लोकसभा, राज्यसभा, राज्यों की विधानसभाओं जैसी लोकतांत्रिक संस्थाओं को लेकर बिना तथ्यों के राजनीतिक आरोप प्रत्यारोप न करें। 

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