सूत्रों के मुताबिक, वह कैन्स्टर कम क्षमता का था, इसलिए बड़ा हादसा नहीं हुआ। इस तरह के कैन्स्टर में हानिकारक केमिकल 'गैस' भी हो सकती है। संसद में आने वालों की जांच के लिए पर्याप्त इंतजाम हैं, लेकिन केमिकल या पाउडर, अगर जूते में छिपा है, तो वह पकड़ में नहीं आता है। अगर कोई स्टील या दूसरी धातू का उपकरण है, तो वह पकड़ में आ जाता है। यह सुरक्षा में एक बड़ी चूक है। पुलिस पूछताछ में इस बात का खुलासा होगा कि आरोपी ने खुद को जांच के दायरे से कैसे बचाया है। गैस का कैन्स्टर, सुरक्षा उपकरणों की पकड़ में इसलिए भी नहीं आ सका, क्योंकि उसे प्लास्टिक या किसी दूसरे ऐसे मैटेरियल में रखा गया था, जो सुरक्षा जांच के दौरान, उपकरणों की पकड़ में नहीं आ सका। इस मामले में चार आरोपी पकड़े गए हैं। दो आरोपी संसद के बाहर भी मौजूद थे। जैसे ही संसद के भीतर हंगामा हुआ, उन्होंने संसद के बाहर वही कैप्सूल छोड़ दिया।