प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब सदन को संबोधित करना शुरू किया तो उनका फ्लो ऐसा बना कि सदन से लेकर देश की सियासत तक थमती चली गई। इसी सदन में कभी सदस्य रहे सियासी जानकारो का कहना है विपक्ष जिन नेहरू के नाम को लेकर लगता हमलावर होता आया था उन्हीं नेहरू का नाम लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में देश के लिए किए गए उनके योगदान और गुणगान का जिक्र किया तो वही इमरजेंसी का भी वह उसी फ्लो में जिक्र करते चले गए।
खास बात यह रही कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेई का गुणगान करते चले गए इस फ्लो में उन्होंने इंदिरा गांधी से लेकर जवाहरलाल नेहरू तक का गुणगान किया। समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और सदन के सबसे बुजुर्ग सांसद शाफिकुर्रहमान का जिक्र किया तो सियासत के कई निशाने भी थमते चले गए।
सियासी जानकारों का मानना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से सदन को संबोधित किया वह हर मायने में सबसे बेहतरीन संबोधन के तौर पर गिना जाएगा। तीन बार सदन में मौजूद रहने वाले। अस्सी वर्षीय पूर्व राज्यसभा सांसद एचबी पटेल कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरह से निष्पक्षता के साथ अपनी पूर्ववर्ती सरकारों के प्रमुख नेताओं और उनके किए गए योगदान का स्मरण किया वह देश के एक बेहतरीन प्रधानमंत्री से ऐसी उम्मीद कर रहे थे।
वह कहते हैं कि जिस तरह से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू का जिक्र किया इस तरह उन्होंने इंदिरा गांधी, लाल बहादुर शास्त्री और अटल बिहारी वाजपेई का भी जिक्र कर उनका गुणगान किया। अस्सी वर्षीय पूर्व सांसद पटेल कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस फ्लो इमरजेंसी का जिक्र किया ठीक उसी तरह उन्होंने इमरजेंसी के बाद देश में लोकतंत्र बहाली का जिक्र कर चंद सेकंड में अपनी बात को खत्म कर आगे की बात शुरू कर दी।
पूर्व सांसद कहते हैं कि प्रधानमंत्री का बोलने का यह फ्लो इतना तजुर्बे भरा था कि लोगों को सीख लेनी चाहिए कि ऐसे मौका पर किस तरह से संबोधन किया जाता है। वह कहते हैं कि अनुमान यही लगाया जा रहा था कि प्रधानमंत्री अपने भाषण में ऐसी किसी भी बात का जिक्र नहीं करेंगे जिसमें सियासत नजर आए। उनका मानना है कि ऐसा हुआ भी। अपनी सरकार से लेकर जवाहरलाल नेहरू, लाल बहादुर शास्त्री और इंदिरा गांधी समेत अन्य नेताओं के प्रधानमंत्रित्व काल की उपलब्धियों का गुणगान करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समूचे सदन की जमकर तालियां बटोरी। सियासी जानकार बताते हैं प्रधानमंत्री के संबोधन से विपक्ष को ऐसा कोई मौका नहीं मिला जिस पर वह उनको घेरते।
राजनीतिक विश्लेषक हरिहर पांडे कहते हैं कि प्रधानमंत्री ने जितने सधे हुए फ्लो के साथ सदन को संबोधित किया वह काबिले तारीफ है। हालांकि पांडे कहते हैं कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन के दौरान सदन और सियासत दोनों को ही थामा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जिस तरीके से सदन के सबसे उम्र दराज सांसद और समाजवादी पार्टी के नेता शफीकुर्ररहमान का जिक्र किया वह सदन के नेता होने के नाते निश्चित ही तारीफ के काबिल था।
वह कहते हैं कि हालांकि इस बहाने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक ऐसा संदेश भी दिया जो बताता है कि विपक्ष अपनी जगह और सम्मान अपनी जगह है। पांडे कहते हैं कि प्रधानमंत्री के संबोधन के दौरान सियासी गलियारों में चर्चा इस बात की भी हो रही थी कि इमरजेंसी जैसे दौर पर प्रधानमंत्री पुरानी सरकारों को कटघरे में खड़ा करते। लेकिन पीएम मोदी ने जिस तरीके से अपने संबोधन में लोकतंत्र की हार और जीत का जिक्र कर देश की प्रगति और पुरानी सरकारों की प्रशंसा करते रहे। उससे यह सभी प्रयास धरे के धरे रह गए जिसमें पुरानी सरकारों को घेरने का अनुमान लगाया जा रहा था।