प्राकृतिक क्षमता के आधार पर काम करता है दिमाग
इंडियन साइक्रिएटिक सोसाइटी के चेयरमैन डॉ. मृगेश वैष्णव ने अमर उजाला को बताया कि मष्तिष्क अपनी प्राकृतिक क्षमता के आधार पर काम करता है। किसी दुर्घटनावश अगर इसमें चोट लग जाती है तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो जाती है। दवाओं से इस खोई क्षमता को वापस लाने के लिए कोशिश की जा सकती है। लेकिन ऐसी कोई भी दवा बाजार में उपलब्ध नहीं है जो किसी व्यक्ति के मष्तिष्क के याद करने की क्षमता को बढ़ा सके।
इसलिए छात्रों को परीक्षा के समय या सामान्य समय में भी इन दवाओं पर भरोसा नहीं करना चाहिए। इनसे उनकी मानसिक क्षमता बढ़ने की बजाय उनके स्वास्थ्य को नुकसान हो सकता है।
चिंता के कारण आती है प्रदर्शन में कमी
कई बार छात्रों को लगता है कि वे कम प्रदर्शन कर पा रहे हैं जबकि वे इससे ज्यादा प्रदर्शन कर सकते हैं। या कई बार उन्हें लगता है कि वे जो कुछ पढ़ते हैं, वह भूल जाते हैं या उन्हें याद नहीं हो रहा है। कभी-कभी परीक्षा हाल में जाने के बाद कुछ छात्रों में घबराहट बढ़ जाती है, या कभी-कभी जब उनके साथी बताते हैं कि उन्होंने सब कुछ याद कर लिया है तो कुछ छात्रों के मन में ये घबराहट हो सकती है कि उन्हें तो ज्यादा याद नहीं है।
कोई साथी जब यह बताता है कि उसने तो बिलकुल भी पढ़ाई नहीं की है, तो वह नकारात्मक माहौल बनाता है जिसमें रहने वाला दूसरा छात्र भी अपने परीक्षा परिणाम को लेकर चिंतित हो जाता है। माता-पिता की ज्यादा उम्मीदों का दबाव भी छात्रों की चिंता बढ़ा देता है। इन सभी परिस्थितियों में छात्रों की चिंता (Anxiety) बढ़ जाती है और इस कारण उनका प्रदर्शन खराब हो सकता है।
क्या करें
डॉ. मृगेश वैष्णव के अनुसार सामान्य तरीके से 7-8 घंटे सोने और प्राकृतिक तौर पर उपलब्ध साफ-स्वच्छ भोजन करने से हमारी कार्य क्षमता बढ़ती है। हल्का-फुल्का 10-20 मिनट का व्यायाम छात्रों को मजबूती देता है। छात्रों को ऐसे किसी भी तनावपूर्ण माहौल का हिस्सा बनने से बचना चाहिए, जहां किसी प्रकार की नकारात्मक बातें उनका जोश कम करने का काम करती हैं।
फास्ट फूड से बचें
कुछ छात्र जो परिवार के साथ नहीं रहते हैं, ज्यादातर भूख लगने पर फास्ट फ़ूड मंगाकर खा लेते हैं। ये फास्ट फूड जैसे कोल्ड ड्रिंक्स, बर्गर, पिज्जा या ज्यादा तली-भुनी चीजें खाने में तो अच्छी लगती हैं, लेकिन इनमें तेल, चीनी या नमक की मात्रा तय मानकों से ज्यादा होते हैं। अब तक वैज्ञानिक प्रमाणों से यह सिद्ध हो गया है कि ज्यादा मात्रा में लंबे समय तक इनका उपभोग मष्तिष्क को शिथिल कर सकता है। इसलिए छात्रों को ज्यादा फास्ट फ़ूड के सेवन से बचना चाहिए।