न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ ने कहा, ‘तमाम शंकाओं को दूर करने के लिए हमने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि मंदिर समिति से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाएगी। रत्न भंडार के विस्तृत जांच के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।’
पुरी स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर के रत्न भंडार में स्थित वस्तुओं की देखरेख के लिए ओडिशा सरकार ने एक समिति गठित की है। समिति ने फैसला लिया है कि रत्न भंडार के अवलोकन और जांच के लिए आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाएगी। दरअसल, समिति को उम्मीद है कि राजकोष के भीतर गुप्त कक्ष अभी भी अस्तित्व में हैं। सिफारिश का उद्देश्य ऐसे ऐतिहासिक संकेतों को संबोधित करना है। पुरी में इस संबंध में एक बैठक आयोजित की गई। इसके बाद समिति के अध्यक्ष न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ ने इस बारे में जानकारी दी।
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बैठक में सर्वसम्मति से लिया गया फैसला
समिति की बैठक में सर्वसम्मति से फैसला लिया गया है कि रत्न भंडार की विस्तृत जांच के लिए आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। न्यायमूर्ति बिस्वनाथ रथ ने कहा, ‘तमाम शंकाओं को दूर करने के लिए हमने सर्वसम्मति से फैसला लिया है कि मंदिर समिति से आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करने की सिफारिश की जाएगी। रत्न भंडार के विस्तृत जांच के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा।’ उन्होंने आगे कहा कि अगर वास्तव में ऐसे कक्ष पाए जाते हैं, तो उचित कदम उठाए जाएंगे। इसके अलावा रत्न भंडार की मरम्मत और रख-रखाव के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
खाली अलमारियों को पुनर्स्थापित किया जाएगा
इसके अलावा समिति ने तय किया है कि खाली अलमारियों को पुनर्स्थापित किया जाएगा क्योंकि इनके रख-रखाव की आवश्यकता है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (एसजेटीए) ने ऐसी वस्तुओं को उपर्युक्त स्थानों में रखने का निर्देश दिया है। समिति ने इस बात की भी सिफारिश की है कि मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) को भी संशोधित किया जाए। समिति का कहना है कि मौजूदा मानक संचालन प्रक्रियाएं इन पहलुओं को संबोधित नहीं करतीं। ओडिशा उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश बिस्वनाथ रथ ने इस बात का भरोसा दिलाया है कि समिति के कार्यों के दौरान मंदिर की परंपराओं को प्रभावित नहीं किया जाएगा।
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आपको बता दें कि हाल ही में ओडिशा सरकार ने जगन्नाथ मंदिर के रत्म भंडार में मौजूद आभूषणों और कीमती वस्तुओं को सूचीबद्ध करने की प्रक्रिया की शुरुआत की है। इसके अलावा मंदिर में मौजूद वस्तुओं के आवश्यक रख-रखाव प्रक्रिया पर भी जोर दिया गया है।