बता दें कि चिनार कॉर्प्स कमांडर रह चुके रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने अपनी किताब 'कितने गाजी आए, कितने गाजी गए' में खुलासा किया है कि पुलवामा हमले के कुछ दिनों बाद ही पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठन जैश ए मोहम्मद के आतंकियों ने आत्मघाती हमला कर पुलवामा जैसे हमले को दोहराने की साजिश रची थी। हालांकि खूफिया सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए सुरक्षाबलों ने आतंकियों को पहले ही एनकाउंटर में ढेर कर दिया।
किताब में बताया गया है कि 24 फरवरी 2019 को खूफिया सूचना मिली कि आतंकी आत्मघाती हमला करने की साजिश रच रहे हैं। जम्मू कश्मीर के कुलगाम इलाके के डीएसपी अमन कुमार ठाकुर ने राष्ट्रीय राइफल्स को इस हमले के बारे में खूफिया सूचना दी थी। सूचना के आधार पर त्वरित कार्रवाई करते हुए सेना और अन्य सुरक्षाबलों की टीमों ने तीन आतंकियों को 24 फरवरी 2019 की रात कुलगाम के तुरीगाम गांव में घेर लिया। जैसे ही आतंकियों के ठिकाने पर मौजूद होने की पुष्टि हुई तो दोनों तरफ से भारी गोलीबारी शुरू हो गई।
ऑपरेशन के दौरान भारतीय सेना का जवान बलदेव राम आतंकियों की गोली का शिकार हो गया। ऐसे में ऑपरेशन में शामिल जम्मू कश्मीर पुलिस के डीएसपी अमन ठाकुर ने अपनी जान की परवाह ना करते हुए घायल सिपाही को सुरक्षित जगह पहुंचाया लेकिन इस दौरान डीएसपी अमन ठाकुर खुद आतंकियों की गोली का शिकार हो गए। घायल होने के बावजूद डीएसपी अमन ठाकुर ने एक आतंकी को गोलीबारी में मार गिराया। मारे गए आतंकी की पहचान जैश ए मोहम्मद के आतंकी नोमान के तौर पर हुई।
34 राष्ट्रीय राइफल्स के जवान नायब सूबेदार सोमबीर ने भी गजब की वीरता दिखाते हुए ओसामा नामक पाकिस्तानी आतंकी को गोलीबारी में मार गिराया। हालांकि इस गोलीबारी में नायब सूबेदार सोमबीर भी घायल हो गए। इस तरह तीनों आतंकी ऑपरेशन में मारे गए लेकिन डीएसपी अमन ठाकुर और नायब सूबेदार सोमबीर भी इस ऑपरेशन में बलिदान हो गए। दोनों को मरणोपरांत शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था।
रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल केजेएस ढिल्लन ने बताया कि अगर तुरीगाम ऑपरेशन सफल नहीं होता और आतंकी हमला करने में कामयाब हो जाते तो इससे बड़ा नुकसान होता।