पाकिस्तान ने सर्दियों में आतंकियों की घुसपैठ कराने के लिए अपनी योजना में कुछ बदलाव किया है। इस बार आगामी मार्च तक की योजना तैयार की गई है। खास बात है कि इससे पहले सर्दियों में पाकिस्तान के लांचिंग पैड से जितने भी आतंकी भारतीय सीमा में धकेले जाते थे, उनमें अधिकांश पाकिस्तानी मूल के होते थे।
चूंकि भारतीय सेना, केंद्रीय अर्धसैनिक बल और जम्मू-कश्मीर पुलिस, घुसपैठ के संभावित ठिकानों पर पहले से ही मुस्तैद हैं, इसलिए पहली बार घुसपैठ कर रहे पाकिस्तानी मूल के आतंकियों के लिए भारतीय सीमा में प्रवेश करना मुश्किल हो जाएगा, वे रास्ता भटक सकते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के मुताबिक, पाकिस्तान के लांचिंग पैड पर 300 से ज्यादा आतंकी मौजूद हैं। वहां कश्मीर के उन युवाओं की एक बड़ी संख्या बताई गई है, जो तालीम लेने के लिए पाकिस्तान में पहुंचे थे।
एक रणनीति के तहत पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई और वहां के आतंकी संगठनों ने उन युवकों के हाथ में बंदूक थमा दी। जिस तरह से भारतीय सुरक्षा बल, घुसपैठ के सभी प्रयासों को नाकाम बना रहे हैं, उसके मद्देनजर आईएसआई ने इस बार घुसपैठ-1 प्लान बनाया है। इसमें केवल कश्मीरी युवाओं को ही सीमा पार भेजा जाएगा। वजह, ये युवक जम्मू-कश्मीर के रास्तों से वाकिफ हैं।
सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान की तरफ से घुसपैठ के सभी प्रयास नाकाम साबित हुए हैं। तीनों ही प्रयासों में भारतीय सुरक्षा बलों ने सभी आतंकियों को मार गिराया है। घुसपैठ कराने के लिए पाकिस्तान युद्ध विराम नीति का उल्लंघन करता है। इस साल अभी तक उल्लंघन की लगभग 4135 घटनाएं हो चुकी हैं। इस साल सर्दियों में पाकिस्तान ने घुसपैठ कराने की जो नई योजना तैयार की है, इसके तहत बर्फबारी के दौरान लाइन ऑफ कंट्रोल के विभिन्न हिस्सों पर फायरिंग की आड़ में घुसपैठ कराई जाती है।
आईएसआई ने अपने नापाक प्लान के तहत जम्मू-कश्मीर में मौजूद अपने गुर्गों, यानी कई ऐसे संगठन जिन्होंने सामाजिक या राजनीतिक नकाब लगाया होता है, उनकी मदद से कश्मीर के युवाओं को तालीम के लिए पाकिस्तान बुला लिया था। यह सब उस खास रणनीति का हिस्सा था, जिसके जरिए पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को बढ़ावा देता है। पाकिस्तान गए सभी युवाओं को आतंकी बनने की ट्रेनिंग दे दी गई है। इनमें कई युवा तो ऐसे भी हैं, जिन्हें आईईडी और ड्रोन हमला तकनीक में निपुण बनाने के लिए अफगानिस्तान भेजा गया था।
पाकिस्तान ने इस बार कश्मीरी युवाओं को घुसपैठ-1 में क्यों शामिल किया है, इस सवाल का उत्तर देते हुए एक अधिकारी बताते हैं, इसकी वजह उन्हें रास्तों की जानकारी होना है। पाकिस्तान जानता है कि भारतीय सुरक्षा बल, घुसपैठ का कोई भी प्रयास सफल नहीं होने दे रहे हैं, इसलिए वह सोच समझकर कदम रख रहा है। कश्मीर के युवा, चूंकि आसपास के रास्तों से वाकिफ हैं, इसलिए पहली खेप में उन्हें भारतीय सीमा में प्रवेश कराने की तैयारी हो रही है।
बर्फबारी और भारी गोलीबारी के बीच पाकिस्तान इन आतंकियों को भारतीय सीमा में धकेलता है। घुसपैठ-1 में छह-छह आतंकियों की टोली तैयार की गई है। हालांकि आईएसआई द्वारा इन आतंकियों को जीपीएस जैसी सुविधाएं मुहैया कराई जाती हैं, लेकिन उसके बाद भी कई बार वे भटक जाते हैं।
पाकिस्तानी मूल के आतंकियों के लिए सर्दी के मौसम में सीमा पार के टारगेट तक पहुंचना बहुत मुश्किल होता है। वे बीच में कहीं न कहीं भारतीय सुरक्षा बलों की गोली का निशाना बन जाते हैं। इन्हीं वजहों से लांचिंग पैड पर कश्मीरी युवाओं का अलग समूह बनाया गया है। पाकिस्तानी मूल के आतंकियों को घुसपैठ-2 में भेजा जाएगा।