फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pakistan: पाकिस्तान में इमरान या फिर कौन? क्या सेना से बढ़ेगा सरकार का टकराव या चलेगी कठपुतली सरकार

सार

अभी 250 सीटों की मतगणना पूरी होने के बाद विजयी प्रत्याशियों की घोषणा की गई है। मतगणना का काम जारी है। इस बीच इमरान खान ने जेल से कहा है कि सरकार बनाना है। गौरतलब है कि 1971 के बाद यह दूसरा चुनाव होगा, जब पाकिस्तान की सेना से सीधी नाराजगी मोल लेने वाले नेता की पार्टी पहले नंबर पर है।
विज्ञापन
पाकिस्तान की सत्ता के संभावित चेहरे - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

भारत की निगाह पाकिस्तान में चुनाव की मतगणना पर टिकी है। पाकिस्तान के युवाओं में लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पार्टी के समर्थन वाले निर्दलीय उम्मीदवारों को भारी सफलता मिली है। इमरान खान जेल में बंद हैं और उनकी पार्टी (पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ,पीटीआई) ने सरकार बनाने का दावा शुरू कर दिया है। हालांकि मतगणना के नतीजों में अभी पीटीआई को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला है। पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन (59 सीट)और बिलावल भुट्टो की पीपीपी (52 सीट)क्रमश: दूसरे और तीसरे नंबर पर है। पीटीआई समर्थित 100 प्रत्याशी चुनाव जीते हैं।

विज्ञापन


अभी 250 सीटों की मतगणना पूरी होने के बाद विजयी प्रत्याशियों की घोषणा की गई है। मतगणना का काम जारी है। इस बीच इमरान खान ने जेल से कहा है कि सरकार बनाना है। गौरतलब है कि 1971 के बाद यह दूसरा चुनाव होगा, जब पाकिस्तान की सेना से सीधी नाराजगी मोल लेने वाले नेता की पार्टी पहले नंबर पर है। ऐसे में बड़ा सवाल है कि पाकिस्तान का अगला हुक्मरान कौन होगा? जेल में बंद इमरान खान या फिर लंदन से राजनीति में लौटे पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ?

बड़े संकट में फिर फंसेगा पाकिस्तान या फिर है इसका कोई निदान?
भारत के पूर्व उच्चायुक्त अजय बिसारिया ने पाकिस्तान में चुनाव धांधली की संभावना मतदान से पहले ही व्यक्त की थी। अजय बिसारिया के मुताबिक पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को पाकिस्तान की सेना का समर्थन हासिल है। 74 साल के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ लंदन में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे थे। माना जा रहा है कि नवाज को लंदन से पाकिस्तान लौटने, सक्रिय राजनीति में हिस्सा लेने और चुनाव लडऩे के लिए पाकिस्तान की सेना ने रोड-मैप तैयार करने में काफी मदद की है। लेकिन पाकिस्तान और खासकर युवाओं में नवाज शरीफ का जादू नहीं चल पाया। पूर्व प्रधानमंत्री बेनजीर भुट्टो के बेटे बिलावल भुट्टो युवा नेता हैं। लेकिन उनकी पार्टी पीपीपी भी कोई जादू नहीं कर सकी। इस बीच चुनाव नतीजों को लेकर इमरान खान की बहन ने सीधे सेना पर आरोप लगाया है। इमरान खान की बहन अलीमा खान ने भी चुनाव में धांधली का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि पीटीआई समर्थित उम्मीदवारों के चुनाव जीतने के बाद भी उन्हें हारा घोषित किया गया है। अलीमा ने संभावना व्यक्त की है कि पाकिस्तान की सेना इमरान खान की हत्या करा सकती है।
विज्ञापन

ऐसे में एक संभावना व्यक्त की जा रही है कि नवाज शरीफ की पार्टी पीएमएल-एन नवाज और भुट्टो की पीपीपी में गठबंधन हो सकता है। इस राजनीतिक तालमेल के जरिए पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ देश के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं। हालांकि इमरान खान की पार्टी ने भी अपने दो को काफी मजबूत कर लिया है।

राष्ट्रपति अल्वी कर रहे हैं ईवीएम की वकालत
पाकिस्तान के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी का वक्तव्य भी आया। अल्वी का बयान मीडिया में तेजी से वायरल हो रहा है। अल्वी ने कहा कि बैलेट पेपर से चुनाव होने के कारण यह स्थिति आई है। उन्होंने कहा कि ईवीएम के जरिए चुनाव कराने की उन्होंने(राष्ट्रपति)कोशिश की थी। ईवीएम के माध्यम से चुनाव हुआ होता तो मतगणना में इतनी देर नहीं लगती। पाकस्तिान में चुनाव मतगणना को लेकर लगातार धांधली के आरोप लग रहे हैं। 9 फरवरी से शुरू हुई मतगणना कई बार रुक चुकी है। वहां चुनाव के बाबत ट्विटर, इंटरनेट आदि पर रोक लगी है। इमरान की पार्टी ने भी चुनाव आयोग से तत्काल चुनाव नतीजों की घोषणा करने की मांग की है। पीटीआई ने चेतावनी दी है कि यदि चुनाव नतीजे जल्द घोषित न किए गए तो विरोध प्रदर्शन को तेज किया जाएगा।

इमरान के लिए बाधा बन सकता है पाकिस्तान की सेना का सत्ता प्रेम
दरअसल पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान जेल में हैं। उन्हें चुनाव लडऩे के लिए प्रतिबंधित किया गया है। पाकिस्तान के चुनाव आयोग के फैसले को बरकरार रखते हुए वहां के सुप्रीमकोर्ट ने इमरान की पार्टी पीटीआई के चुनाव चिन्ह (बल्ला)को भी प्रतिबंधित कर रखा है। इसलिए पीटीआई के उम्मीदवारों ने निर्दलीय चुनाव लड़ा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार इमरान की पार्टी के नेता मजलिस वहदत-ई-मुसलमीन के साथ तालमेल की कोशिशों में लगे हैं, लेकिन उनके इस रास्ते में पाकिस्तान की सेना बड़ी बाधा बन सकती है।
पाकिस्तान की सेना का सत्ता प्रेम जग जाहिर है। पाकिस्तान में अपनी सेवाएं दे चुके विदेश सेवा के बताते हैं कि पड़ोसी देश पाकिस्तान के जनरल और पूर्व जनरलों का वहां के रीअल स्टेट, उद्योगों समेत तमाम कारोबार में बड़ा निवेश है। पाकिस्तान की सेना देश में राजनीतिक मामलों में पहले कई बार हस्तक्षेप कर चुकी है। कई बार वहां सैन्य शासन लग चुका है। कहा जा रहा है कि वर्तमान चुनाव में सेना ने अपनी छवि की परवाह किए बिना पीएमएल-एन और इसके नेता नवाज शरीफ को अपना सहयोग दिया है। वहां नवाज शरीफ के सत्ता में न लौटने पर गठित होने वाली सरकार और सेना के बीच में टकराव का खतरा बना रहेगा।

पाकिस्तान में नवाज के नेतृत्व में गठबंधन सरकार बनने की संभावना अधिक
पाकिस्तान में चल रही चुनाव प्रक्रिया और संभावना पर भारत के कई विशेषज्ञों से बातचीत करने की कोशिश की गई, लेकिन अभी नई सरकार के गठन से पहले कोई खुलकर नहीं बोलना चाहता। एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि संभावना वहां एक कमजोर गठबंधन की सरकार के सत्ता में आने की है। बहुत हद तक संभव है कि सेना सहयोग करे। पीएमएल-एन और पीपीपी तालमेल करके सरकार बनाने के लिए आगे आएं। उन्हें कुछ और छोटे दलों का समर्थन मिले और 163 सदस्यों के आंकड़े के साथ सरकार का गठन हो। क्योंकि इमरान की पार्टी के सत्ता में आने दशा में वहां सेना और सरकार के बीच में टकराव बढऩे के आसार हैं। हालांकि भारतीय विशेषज्ञों का कहना है कि पीएमएल-नवाज और इसके नेता नवाज शरीफ के नेतृत्व वाली गठबंधन की सरकार भी सेना की ही बैशाखी पर चलने के लिए मजबूर होगी। इसलिए पाकिस्तान में किसी मजबूत सरकार के बनने के आसार कम नजर आ रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें