विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि पाकिस्तान के विदेश मंत्री का दासू की घटना को लेकर आया बयान भारत की छवि खराब करने का एक और प्रयास है। ऐसा कर के पड़ोसी देश खुद आतंकियों की सुरक्षित शरण स्थली व क्षेत्रीय अस्थिरता का केंद्र होने के दाग से मुक्ति चाहता है। वह अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान अपनी ओर से हटाना चाहता है।
शाह महमूद कुरैशी ने रॉ का हाथ होने का लगाया आरोप
पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने आरोप लगाया है कि दासू हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले चीनी इंजीनियरों की बस पर हुए हमले में भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का हाथ है। उन्होंने यह भी कहा कि इसमें अफगानी एनएसए का ऑफिस राष्ट्रीय सुरक्षा निदेशालय (एनडीएस) भी शामिल था।
अफगानिस्तान का इस्तेमाल हुआ
इस्लामाबाद में कुरैशी ने आरोप लगाया कि हमले के दौरान अफगानिस्तान का इस्तेमाल किया गया था। कुरैशी ने दावा किया कि इस्तेमाल किए गए वाहन को पाकिस्तान में तस्करी कर लाया गया था। चीन ने इस घटना को लेकर पाकिस्तान से कड़ी नाराजगी जताई थी। मामला इतना बढ़ गया था कि चीन को मनाने के लिए इमरान खान ने शाह मदमूद कुरैशी और आईएसआई के प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल फैज हामिद को बीजिंग भेजना पड़ा था।
कुरैशी ने कहा कि हमने 36 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज की जांच की और जांच के तहत क्षेत्र लगभग 1,400 किलोमीटर था। पाकिस्तानी अधिकारियों ने घटना के संचालकों का पता लगा लिया है और कहा है कि अब हम जानते हैं कि वे किसके साथ जुड़े थे। इस्तेमाल किया गया वाहन पाकिस्तान में तस्करी कर लाया गया था। उन्होंने दावा किया कि आत्मघाती हमलावर खालिद उर्फ शेख एक अफगान नागरिक था।
बता दें, 13 जुलाई को पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के दासू में एक बस में धमाका हुआ था। हमले में नौ चीनी इंजीनियरों समेत 13 लोग मारे गए थे। दासू में विश्व बैंक व चीन की मदद से एक पनबिजली परियोजना लगाई जा रही है। चीनी कंपनी इसका निर्माण कर रही है। इस हमले के बाद चीन कंपनी ने काम रोक दिया है।