पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने पूर्व पीएम इमरान खान को चुनाव आयोग के समक्ष पेश करने से मना कर दिया है। ईसीपी ने कहा, सुरक्षा एजेंसियां एक व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ हैं तो चुनावों के दौरान सुरक्षा कैसे प्रदान कर सकती हैं।
पाकिस्तान की कार्यवाहक सरकार ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान को चुनाव आयोग के समक्ष पेश करने से इनकार कर दिया है। पंजाब पुलिस ने ईसीपी को सूचित किया कि सुरक्षा खतरों के कारण 71 वर्षीय इमरान खान को पेश करना संभव नहीं है, जो साइफर मामले में रावलपिंडी की अदियाला जेल में हैं। पंजाब पुलिस के एक अधिकारी ने आंतरिक मंत्रालय की ओर से आयोग को बताया कि इमरान खान की जान को खतरा है।
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पाकिस्तान चुनाव आयोग के तीखे सवाल
वहीं पाकिस्तान का चुनाव आयोग जवाब से संतुष्ट नहीं हुआ और पूछा कि अगर देश की सुरक्षा एजेंसियां एक व्यक्ति को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में असमर्थ हैं, तो आगामी आम चुनावों के दौरान सुरक्षा कैसे प्रदान कर सकती हैं। वहीं वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने सुझाव दिया कि ईसीपी को मामले की सुनवाई अदियाला जेल में करनी चाहिए। सुनवाई के दौरान ईसीपी ने कहा, आप हमें अदियाला में सुनवाई करने का आदेश कैसे दे सकते हैं। अगर आंतरिक मंत्रालय एक व्यक्ति को सुरक्षा प्रदान नहीं कर सकता है, तो हम चुनाव कैसे कराएंगे। बता दें ईसीपी ने मामले की सुनवाई के लिए आंतरिक सचिव आफताब अकबर दुर्रानी को बुलाने का फैसला किया और सुनवाई 13 नवंबर तक के लिए स्थगित कर दी।
क्या है मामला
पाकिस्तान का चुनाव आयोग (ईसीपी) पाकिस्तान-तहरीक-ए-इंसाफ (पीटीआई) के अध्यक्ष और असद उमर और फवाद चौधरी सहित अन्य पार्टी नेताओं के खिलाफ अवमानना मामले की सुनवाई कर रहा था, जो सुनवाई के लिए उपस्थित थे। जबकि इमरान खान का प्रतिनिधित्व उनके वकील शोएब शाहीन द्वारा किया गया था। पिछले साल मार्च में वाशिंगटन में देश के दूतावास द्वारा भेजे गए एक गुप्त राजनयिक केबल (साइफर) का खुलासा करके आधिकारिक गोपनीयता अधिनियम का उल्लंघन करने के आरोप में इमरान खान के खिलाफ मामला दर्ज होने के बाद अगस्त में इमरान खान को गिरफ्तार किया गया था।
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वहीं अन्य मामले में इस्लामाबाद उच्च न्यायालय (आईएचसी) के न्यायमूर्ति मियांगुल हसन औरंगजेब और न्यायमूर्ति समन रफत ने साइफर मामले में जेल मुकदमे के खिलाफ इमरान खान की इंट्रा-कोर्ट अपील को खारिज कर दिया। उनके वकील सलमान अकरम राजा ने पीठ के समक्ष दलील दी कि संघीय सरकार के पास जेल में मुकदमा चलाने के लिए अधिसूचना जारी करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, वे न्यायिक अधिकारी हैं। संघीय सरकार के पास न्यायाधीशों को चुनने का कोई अधिकार नहीं है। हालांकि,पीठ ने याचिका खारिज कर दी।