पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को अयोग्य ठहराए जाने के बाद पाकिस्तान में पैदा हुई राजनीतिक अनिश्चितता का फायदा इस मुस्लिम देश की सेना उठाएगी, जो भारत के खिलाफ एक बार फिर और आक्रामक रूप से आतंकवाद का इस्तेमाल कर सकती है।
विदेश नीति के विशेषज्ञों ने रविवार को यह आशंका जताई। उन्होंने यह भी माना कि यदि पाकिस्तानी सेना भारत के साथ संबंध बेहतर करने की कोशिश नहीं करती तो पहले से बिगड़े हुए भारत-पाक संबंध और बिगड़ सकते हैं।
पाकिस्तान में 1998 से 2000 तक भारत के उच्चायुक्त रहे जी पार्थसारथी ने कहा, ‘पाकिस्तान में राजनीतिक अनिश्चितता और अस्थिरता का फायदा इस देश की सेना उठाएगी। सेना के वर्चस्व का मतलब भारत के खिलाफ आतंकवादी समूहों को एक बार फिर सक्रिय करने की नीति को जारी रखना होगा।
अमेरिका में 2009 से 2011 तक राजदूत रहीं मीरा शंकर का भी मानना है कि इस्लामाबाद की आंतरिक अस्थिरता देश में पाक सेना के कब्जे को मजबूत बनाएगी। 1999-2000 में भारत के विदेश सचिव रहे ललित मानसिंह ने कहा कि पाकिस्तान में राजनीतिक अस्थिरता सेना को आगे बढ़ाएगी और ऐसे परिदृश्य में वह भारत के खिलाफ आतंकवादी गतिविधियों को और अधिक आक्रामक बनाएगी।
मानसिंह ने यह भी कहा कि पाकिस्तान दोकलम पर भारत-चीन गतिरोध का फायदा भारत के खिलाफ सीमापार आतंकवाद बढ़ाकर ले सकता है और इस्लामाबाद की आंतरिक राजनीतिक संरचना पाक सेना को इसके लिए उकसावे का काम करेगी।