विधानसभा चुनाव में एक तरफ भाजपा को अपार जमसमर्थन मिला। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को करारी हार मिली है। अब इस हार को लेकर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम ने चिंता जताई है। उन्होंने हाल ही में हुए छत्तीसगढ़ और राजस्थान विधानसभा चुनावों में पार्टी की हार को चिंता का विषय बताया।
विपक्षी दलों को इसका एहसास होना चाहिए
चिदंबरम ने रविवार को कहा कि भाजपा हर चुनाव ऐसे लड़ती है जैसे कि यह आखिरी लड़ाई हो और विपक्षी दलों को इसका एहसास होना चाहिए। तीन राज्यों (छत्तीसगढ़, राजस्थान और मध्य प्रदेश) में मिली जीत भाजपा के लिए अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन है। छत्तीसगढ़ और राजस्थान में कांग्रेस की हार बेहद चौंकाने वाली और चिंता का विषय है। उन्होंने कहा, 'मेरा मानना है कि पार्टी का नेतृत्व कमजोरियों को दूर करेगा।'
हालांकि, उन्होंने कहा कि चार बड़े राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और तेलंगाना में पार्टी का 40 प्रतिशत वोट शेयर बरकरार दिख रहा है। चिदंबरम ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि अंतिम छोर तक अभियान, बूथ प्रबंधन और निष्क्रिय पड़े मतदाताओं को चुनाव के दिन मतदान केंद्र तक लाने जैसे मुद्दों पर ध्यान देने से लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी का वोट प्रतिशत 45 प्रतिशत तक बढ़ सकता है।
हाल ही में मिली थी हार
गौरतलब है, हाल ही में पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव हुए थे, जिसमें भाजपा को तीन राज्यों में जीत मिली थी। वहीं कांग्रेस को मात्र एक राज्य तेलंगाना से संतोष करना पड़ा था। भाजपा ने राजस्थान और छत्तीसगढ़ दोनों पर नियंत्रण हासिल किया और मध्य प्रदेश में सत्ता बरकरार रखी है।
इन मुद्दों पर चिंता
भाजपा के ध्रुवीकरण, मुस्लिम विरोधी और ईसाई विरोधी दुष्प्रचार और उग्र राष्ट्रवाद पर चिंता जताते हुए कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य ने कहा कि पार्टी को इसका करारा जवाब देना चाहिए। जातिगत जनगणना को 2024 के चुनावों के लिए पार्टी का शीर्ष एजेंडा होने के बारे में चिदंबरम ने कहा, 'यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है लेकिन यह निर्धारण कारक नहीं हो सकता है। मेरे विचार में, बेरोजगारी और मुद्रास्फीति सूची में सबसे ऊपर है। हर सर्वेक्षण में, ये दो मुद्दे हैं जो लोगों को सबसे अधिक चिंतित करते हैं।'
यह पुराना मामला है
नोटबंदी, राष्ट्रीय नागरिक पंजीकरण (एनआरसी) और संशोधित नागरिकता कानून (सीएए) आगामी चुनावों में भाजपा के वोट बैंक को प्रभावित करेंगे इस सवाल पर कांग्रेस वरिष्ठ नेता ने कहा, 'नोटबंदी एक पुराना मुद्दा है। इसलिए अब हम जब्त किए गए कालेधन के बारे में बात करेंगे। विधानसभा चुनाव के अंतिम दौर में चुनाव आयोग ने 1,760 करोड़ रुपये का कथित बेहिसाबी धन जब्त किया था। हालांकि, एनआरसी और सीएए महत्वपूर्ण मुद्दे बन जाएंगे यदि सरकार उन्हें लागू करने की कोशिश करती है।'
हवा का बदलेगा रुख
2024 के लोकसभा चुनावों में भाजपा की जीत की भविष्यवाणी करने वाले सर्वेक्षणों पर चिदंबरम ने कहा, 'हवा की रुख फिलहाल भाजपा के पाले में है। पर हवाओं की दिशा बदल सकती हैं। भाजपा कभी भी चुनाव को हल्के में नहीं लेती। यह ऐसे लड़ती है जैसे कि यह आखिरी लड़ाई हो। विपक्षी दलों को भगवा पार्टी की लड़ने की ताकत का एहसास होना चाहिए।'
ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करनी होगी...
लोकसभा चुनाव के लिए इंडिया ब्लॉक की तैयारियों के बारे में चिदंबरम ने कहा कि गठबंधन के नेताओं को ऐसे उम्मीदवारों की पहचान करनी होगी जो कम से कम 400-425 सीटों पर भाजपा का मुकाबला कर सकें। उन्होंने कहा, 'मैं इंडिया के ब्लॉक नेताओं की बैठक के दौरान होने वाली आंतरिक चर्चाओं से अवगत नहीं हूं। मुझे यकीन है कि उन्हें पता है कि मात्र तीन महीने बचे हैं। इसलिए सबसे महत्वपूर्ण काम कम से कम 400-425 सीटों की पहचान करना जरूरी है, जहां विपक्षी गठबंधन को भाजपा का मुकाबला करने के लिए एक उम्मीदवार खड़ा करना चाहिए।'
प्रधानमंत्री पद के लिए पार्टी के चेहरे और सीटों के बंटवारे की योजना के बारे में चिदंबरम ने कहा कि गठबंधन के नेताओं के प्रति लोगों की प्रतिक्रिया से प्रधानमंत्री पद के चेहरे की पहचान करने में मदद मिलेगी, लेकिन इससे ज्यादा जरूरत आगामी लोकसभा चुनाव जीतने की है। उन्होंने कहा, 'सरकार का नेतृत्व करने वाले व्यक्ति का चयन चुनाव के बाद किया जाएगा। नेता चुनने के लिए लोगों की प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल चुनाव जीतना जरूरी है।'