मुंबई में 10 अप्रैल से ऐसे उद्योगों का संचालन ठप पड़ जाएगा जिन्हें कच्चे माल के रूप में ऑक्सीजन की जरूरत होती है। सोमवार को औद्योगिक इस्तेमाल के लिए एक ऑक्सीजन सिलिंडर की कीमत दोगुनी (360 रुपये) कर दी गई थी। हालांकि, अगर कोई उद्योग ऑक्सीजन का इस्तेमाल जारी रखना चाहता है तो उसे लाइसेंसिंग प्राधिकरण से आवश्यक मंजूरी लेनी पड़ेगी। बता दें कि महाराष्ट्र में एक दिन में करीब 1250 मीट्रिक टन ऑक्सीजन का उत्पादन होता है।
उल्लेखनीय है कि महाराष्ट्र इस समय कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से बुरी तकरह जूझ रहा है। ये प्रतिबंध कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों के चलते कोविड केयर सेंटर और अस्पतालों में अतिरिक्त ऑक्सीजन की बढ़ती जरूरत को देखते हुए लगाया गया है। मुंबई के अलावा महाराष्ट्र के इंदौर और भोपाल में भी ऑक्सीजन की औद्योगिक आपूर्ति रोक दी गई है और निर्देश दिया गया है कि ऑक्सीजन उत्पादन इसकी आपूर्ति केवल अस्पतालों में करें।
इंदौर में भी औद्योगिक आपूर्ति पर प्रतिबंध
मध्यप्रदेश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित जिले इंदौर में भी बीते दिनों ऐसा ही आदेश जारी किया गया था। ऑक्सीजन की औद्योगिक आपूर्ति रोकने के साथ यहां रेमेडिसिविर और टोसिलिजुमाब इंजेक्शन की खरीद के लिए भी नियम बनाए हैं। इन दोनों इंजेक्शन का इस्तेमाल कोविड-19 बीमारी से पीड़ित व्यक्ति के इलाज में होता है। उल्लेखनीय है कि जिले के 61 फीसदी कोरोना मरीजों का इलाज घर में हो रहा है जबकि 39 फीसदी अस्पतालों में भर्ती हैं।
नागपुर में 516 फीसदी तक बढ़ा उपयोग
दूसरी ओर महाराष्ट्रे नागपुर जिले में पिछले 43 दिनों के भीतर ऑक्सीजन का चिकित्सकीय उपयोग 516 फीसदी तक बढ़ गया है। यह आंकड़ा 21 फरवरी से चार अप्रैल तक का है। आंकड़ों के अनुसार 21 फरवरी को यहां ऑक्सीजन की खपत 19 मीट्रिक टन थी और चार अप्रैल को यह बढ़कर 117 मीट्रिक टन पर पहुंच गई। यहां की एकमात्र ऑक्सीदन उत्पादन इकाई को भी औद्योगिक आपूर्ति बंद कर केवल अस्पताओं को ऑक्सीजन पहुंचाने का निर्देश दिया गया है।