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War: डेनमार्क में यूरोप के रक्षा मंत्रियों की बैठक, यूक्रेन जंग रोकने के लिए रूस पर दबाव बनाने का लिया संकल्प

Fri, 29 Aug 2025 02:46 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ब्रसेल्स/नई दिल्ली।

सार

War: यूरोप के रक्षा मंत्रियों ने रूस के कीव पर हमले की कड़ी निंदा करते हुए यूक्रेन को ज्यादा सैन्य मदद देने और रूस पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही। वहीं, भारत में यूक्रेन के राजदूत ने कहा कि उनका देश किसी भी हाल में हार नहीं मानेगा और अपने इलाके नहीं छोड़ेगा। राजदूत ने भारत के शांति के प्रयासों की सराहना की। 
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रूस-यूक्रेन जंग - फोटो : PTI
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विस्तार
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यूरोपीय देशों के रक्षा मंत्रियों ने डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में यूक्रेन युद्ध पर चर्चा करने के लिए बैठक की। यह बैठक ऐसे समय में हुई, जब रूस ने कीव पर हवाई हमला किया है, जिसमें 23 लोगों की मौत हो गई और एक यूरोपीय राजनयिक दफ्तर को नुकसान पहुंचा। 
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इस हमले से आक्रोशित यूरोप के रक्षा मंत्रियों ने बैठक से पहले ही रूस की आलोचना की और उसके खिलाफ और सख्त कदम उठाने की मांग की। इनमें जमा रूसी फंड जब्त करना, नए प्रतिबंध लगाना और यूक्रेन की सेना को अधिक मदद देना शामिल है। बैठक में यूक्रेन को सैन्य मदद बढ़ाने और यूरोपीय संघ में उसकी सदस्यता को लेकर चर्चा की गई। 

नेताओं ने इस बात पर भी चर्चा की कि यूरोपीय सैनिकों को यूक्रेन में तैनात किया जाए, ताकि वहां की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके और भविष्य में अगर शांति समझौता हो तो उसकी निगरानी की जा सके। हालांकि, अमेरिका की मध्यस्थता कोशिशें फिलहाल रुकी हुई दिख रही हैं। यूरोपीय संघ की विदेश नीति प्रमुख काजा कल्लास ने कहा, हर कोई जानता है कि पुतिन शांति के प्रयासों का मजाक उड़ा रहे हैं। ऐसे में दबाव ही एकमात्र रास्ता है जो असर करता है। 
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कीव में दो मिसाइलें यूरोपीय संघ के राजनयिक दफ्तर से करीब 50 मीटर की दूरी पर गिरीं। वहां कोई घायल नहीं हुआ, लेकिन खिड़कियां और दरवाजे टूट गए। इस हमले के विरोध में ब्रसेल्स में रूसी राजदूत को तलब किया गया।

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने शुक्रवार को यूक्रेन पर हवाई हमलों के मामले में आपात बैठक बुलाई। यह बैठक यूक्रेन और यूरोपीय परिषद के पांच सदस्य देशों ब्रिटेन, फ्रांस, स्लोवेनिया, डेनमार्क और ग्रीस की मांग पर हुई। यूक्रेन के दो वरिष्ठ अधिकारी शुक्रवार को अमेरिका के ट्रंप प्रशासन से भी इस मसले पर बात करने वाले हैं।

व्हाइट हाउस की प्रेस सचिव कैरोलिन लेविट ने इस हमले के बाद रूस के राष्ट्रपति पुतिन और यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की की आलोचना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को यह खबर सुनकर दुख हुआ, लेकिन उन्हें कोई हैरानी नहीं हुई। लेविट ने यह भी कहा कि हाल के हफ्तों में यूक्रेन ने रूस के तेल उद्योग पर भी ताकतवर हमले किए हैं। उन्होंने कहा, शायद दोनों ही पक्ष इस युद्ध को खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। राष्ट्रपति चाहते हैं कि युद्ध खत्म हो, लेकिन दोनों देशों के नेताओं को भी ऐसा ही चाहना होगा। 

कोपेनहेगन में काजा कल्लास ने कहा कि यूरोपीय संघ के 27 देशों के रक्षा मंत्री रूस पर और प्रतिबंधों, यूक्रेन को अधिक हथियार आपूर्ति और युद्ध के बाद की सुरक्षा की तैयारी पर चर्चा कर रहे हैं। इसमें यह भी शामिल है कि युद्ध के बाद यूरोपीय संघ की प्रशिक्षण टीमों को यूक्रेन में भेजा जा सकता है। उन्होंने कहा, हम आज इस पर चर्चा कर रहे हैं कि मिशन के उद्देश्यों को कैसे बदला जाए ताकि शांति समझौते के बाद तुरंत काम शुरू किया जा सके। उन्होंने रूस की आर्थिक नब्ज को निशाना बनाने वाले और सख्त प्रतिबंधों की मांग की।

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गुरुवार को अमेरिका ने यूक्रेन को 825 मिलियन डॉलर के हथियार बेचने की मंजूरी दी। इसमें लंबी दूरी की मिसाइलें और अन्य सैन्य उपकरण शामिल हैं, जिससे यूक्रेन की रक्षा क्षमता बढ़ेगी। लिथुआनिया की रक्षा मंत्री डोविले शकालिएने ने कहा कि कीव पर हुआ हमला यह दिखाता है कि अब शांति की उम्मीद करना 'नासमझी' है। उन्होंने कहा, 'पुतिन सिर्फ समय खींच रहे हैं ताकि और लोगों की जान ली जा सके और यह दिखाने का नाटक कर सकें कि वे शांति चाहते हैं।

किसी भी स्थिति में अपने इलाकों को नहीं छोड़ेगा यूक्रेन: राजदूत पोलिशचुक
रूस और यूक्रेन के बीच जारी जंग के बीच भारत में यूक्रेन के राजदूत ओलेक्जेंडर पोलिशचुक ने कहा है कि यूक्रेन हार नहीं मानेगा और किसी भी तरह अपने इलाकों को नहीं छोड़ेगा।  गुरुवार रात पीटीआई से बातचीत में उन्होंने यह भी कहा कि रूस को भारत के साथ व्यापार करने से फायदा हुआ है।

उन्होंने आरोप लगाया कि रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को भारत के साथ व्यापार से फायदा हुआ और उन्होंने तेल पर भारी छूट भी दी, लेकिन समस्या यह है कि वह इस पैसे का इस्तेमाल रूस की जनता की भलाई के लिए नहीं, बल्कि युद्ध के लिए कर रहे हैं। राजदूत ने दावा किया कि रूस को अगले साल अपने सामाजिक कार्यक्रमों को चलाने में दिक्कत आ सकती है। उन्होंने कहा कि रूस को यह तेल से मिली कमाई अपने लोगों की भलाई पर खर्च करनी चाहिए, ना कि इस युद्ध को बढ़ाने पर।
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यूक्रेनी राजदूत का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब अमेरिका के ट्रंप प्रशासन ने 27 अगस्त से भारतीय सामानों पर 50% टैरिफ लगा दिया है। अमेरिका ने भारत के रूस से कच्चा तेल खरीदने पर भी 25 फीसदी का अतिरिक्त शुल्क लगाया है, जिससे भारत-अमेरिका संबंधों में खटास आई है। रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर पोलिशचुक ने दोहराया कि यूक्रेन न तो पीछे हटेगा और न ही मॉस्को की किसी शर्त या इलाका छोड़ने की मांग को मानेगा।

जब उनसे ट्रंप के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो के उस बयान पर पूछा गया कि शांति का रास्ता नई दिल्ली से होकर गुजरता है, तो उन्होंने जवाब दिया, यह सवाल शायद अमेरिका के दूतावास से पूछना चाहिए, मुझसे नहीं। हालांकि, राजदूत ने भारत के शांति के प्रयासों की तारीफ की और खास तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को सराहा। उन्होंने कहा, हमें भारत सरकार से यह अटूट समर्थन पहले से उम्मीद थी। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि प्रधानमंत्री मोदी ने यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की को उनके राष्ट्रीय दिवस पर पत्र लिखा था। राजदूत ने यह भी बताया कि भारत और यूक्रेन दोनों ही अगस्त में स्वतंत्रता दिवस मनाते हैं और इसे उन्होंने लोकतंत्र और आजादी के साझा मूल्यों का प्रतीक बताया।




 
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