राज्यसभा में पूरक प्रश्नों का उत्तर देते हुए संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने बताया कि नीतियों में बदलाव और संशोधन की आवश्यकता के कारण कुछ आश्वासनों को लागू नहीं किया जा सका है। उन्होंने आगे बताया कि इन आश्वासनों को आश्वासन की तिथि से तीन महीने की अवधि के भीतर पूरा किया जाना जरूरी है। हालांकि, कुछ आश्वासनों को समय पर लागू नहीं किया जा सका और आश्वासन समिति से समय-सीमा बढ़ाए जाने की मांग की गई है।
किस सत्र में कितने दिए गए आश्वासन?
जानकारी के मुताबिक संसद के 253वें सत्र में कुल 120, 254वें सत्र में 105, 255वें सत्र में 25, 256वें सत्र में 221, 257वें सत्र में 70, 258वें सत्र में 95, 259वें सत्र में 118, 260वें सत्र में 99, 261वें विशेष सत्र में शून्य आश्वासन और 262वें सत्र में 60 आश्वासन दिए गए थे।
'संसदीय कार्य मंत्रालय ने बनाया है खास सॉफ्टवेयर'
वहीं वाईएसआरसीपी सांसद रयागा कृष्णैया की तरफ से पूछे गए सवालों का उत्तर देते हुए मंत्री एल. मुरुगन ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्रालय ने ऑनलाइन आश्वासन निगरानी प्रणाली (ओएएमएस) नामक एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है और सभी मंत्रालयों को आईडी और पासवर्ड भी दिए गए हैं। सभी मंत्रालय इस पोर्टल पर कार्यान्वित रिपोर्ट अपलोड, किसी आश्वासन को छोड़ने का अनुरोध और आश्वासनों की पूर्ति के लिए विस्तार की मांग कर सकते हैं। जिसमें आश्वासनों के समय पर कार्यान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश भी दिए गए हैं।
'सभी मंत्रालयों को समय-समय पर मिलता है रिमांइडर'
संसदीय कार्य राज्य मंत्री एल. मुरुगन ने आगे बताया कि संसदीय कार्य मंत्रालय समय-समय पर सभी मंत्रालयों / विभागों को लंबित आश्वासनों को जल्द से जल्द पूरा करने के मामले में मंत्री और उच्च अधिकारियों के स्तर से याद दिलाता रहता है। इसके अलावा, इस प्रणाली के माध्यम से संबंधित मंत्रालयों / विभागों को हर महीने ऑटो जनरेटेड रिमांइडर भी भेजे जा रहे हैं।